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Home » Blog » Musk Okra Farming in Hindi: कस्तूरी भिंडी कैसे उगाएं

Musk Okra Farming in Hindi: कस्तूरी भिंडी कैसे उगाएं

January 8, 2026 by Bhupendra Dahiya Leave a Comment

Musk Okra Farming in Hindi: कस्तूरी भिंडी कैसे उगाएं

How to Grow Musk Okra in Hindi: कस्तूरी भिंडी (मूषक दाना), जो अपनी अनोखी खुशबू और औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है, सदियों से पारंपरिक भारतीय पद्धतियों का एक अहम हिस्सा रही है। अक्सर आयुर्वेद और अलग-अलग सांस्कृतिक रीति-रिवाजों में इसके इस्तेमाल के लिए मशहूर, इस खास जड़ी-बूटी ने आज की खेती में काफी ध्यान खींचा है।

जैसे-जैसे किसान टिकाऊ और फायदेमंद फसलों की तलाश कर रहे हैं, कस्तूरी भिंडी की खेती एक अच्छा मौका देती है। यह लेख कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की खेती के ऐतिहासिक महत्व, खेती के लिए सही माहौल, खेती के तरीकों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में बताता है, साथ ही इसके आर्थिक फायदों और इस बदलते बाज़ार में किसानों को मिलने वाली मदद पर भी रोशनी डालता है।

Table of Contents

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  • कस्तूरी भिंडी के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Musk Okra)
  • कस्तूरी भिंडी के लिए मिट्टी और तैयारी (Soil and Preparation for Musk Okra)
  • कस्तूरी भिंडी की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Musk Okra)
  • कस्तूरी भिंडी की बुवाई का समय और विधि (Musk Okra Sowing Time and Method)
  • कस्तूरी भिंडी में खाद और उर्वरक (Fertilization and Manuring of Musk Okra)
  • कस्तूरी भिंडी में सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management in Musk Okra)
  • कस्तूरी भिंडी में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Musk Okra)
  • कस्तूरी भिंडी में कीट और रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control in Musk Okra)
  • कस्तूरी भिंडी फूल, फल और बीज उपज (MuskOkra Flower, Fruit, and Seed Yield)
  • कस्तूरी भिंडी की कटाई, सुखाना और भंडारण (Harvesting, Drying, and Storage)
  • कस्तूरी भिंडी की उपज एवं आर्थिक लाभ (MuskOkra Yield and Economic Benefits)
  • कस्तूरी भिंडी पर निष्कर्ष (Conclusion on Musk Okra)
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

कस्तूरी भिंडी के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Musk Okra)

कस्तूरी भिंडी की खेती के लिए उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह फसल गर्म और आर्द्र वातावरण में अच्छी तरह बढ़ती है। बीज अंकुरण और प्रारंभिक वृद्धि के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श रहता है, जबकि पौधों की बढ़वार और फूल आने की अवस्था में 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है।

अधिक ठंड, पाला या अत्यधिक वर्षा कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। हल्की से मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों में यह फसल अच्छी उपज देती है, हालांकि जलभराव की स्थिति से बचाव आवश्यक है।

कस्तूरी भिंडी के लिए मिट्टी और तैयारी (Soil and Preparation for Musk Okra)

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की खेती के लिए अच्छी जलनिकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। भारी एवं जलभराव वाली मिट्टी में इसकी जड़ें सड़ने का खतरा रहता है, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।

भूमि की तैयारी के लिए खेत की गहरी जुताई की जाती है ताकि खरपतवार नष्ट हो जाएं और मिट्टी भुरभुरी बन सके। इसके बाद 2–3 बार हल्की जुताई कर पाटा लगाया जाता है। अंतिम जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिट्टी में मिला देने से भूमि की उर्वरता बढ़ती है।

कस्तूरी भिंडी की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Musk Okra)

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की कुछ स्थानीय और उन्नत किस्में प्रचलित हैं, जो जलवायु एवं क्षेत्र के अनुसार अच्छी उपज देती हैं। स्थानीय किस्में प्रायः अधिक सुगंधित बीज देती हैं, जबकि उन्नत किस्में अपेक्षाकृत अधिक उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती हैं।

किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और बाजार मांग को ध्यान में रखते हुए बीज का चयन करना चाहिए। प्रमाणित एवं स्वस्थ बीजों का उपयोग करने से अंकुरण अच्छा होता है और फसल समान रूप से बढ़ती है।

कस्तूरी भिंडी की बुवाई का समय और विधि (Musk Okra Sowing Time and Method)

कस्तूरी भिंडी की बुवाई का उपयुक्त समय फरवरी-मार्च तथा जून-जुलाई माना जाता है। सिंचित क्षेत्रों में फरवरी–मार्च की बुवाई अधिक लाभदायक रहती है, जबकि वर्षा आधारित खेती के लिए मानसून के आरंभ में बुवाई की जाती है। बीजों की बुवाई कतारों में की जाती है ताकि निराई-गुड़ाई और देखभाल में सुविधा रहे।

सामान्यतः 45 से 60 सेंटीमीटर कतार दूरी और 30 से 45 सेंटीमीटर पौधे से पौधे की दूरी रखी जाती है। कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) बुवाई से पहले बीजों को हल्के गर्म पानी में भिगोने या जैविक फफूंदनाशक से उपचारित करने से अंकुरण प्रतिशत बढ़ता है।

कस्तूरी भिंडी में खाद और उर्वरक (Fertilization and Manuring of Musk Okra)

कस्तूरी भिंडी की अच्छी उपज के लिए संतुलित पोषण आवश्यक है। भूमि की तैयारी के समय 10–15 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की सड़ी खाद मिलाने से मिट्टी की संरचना सुधरती है। इसके अतिरिक्त नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग पौधों की बढ़वार, फूल एवं बीज निर्माण में सहायक होता है।

नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और शेष आधी मात्रा पौधों की बढ़वार अवस्था में देने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। जैविक खेती करने वाले किसान कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) में वर्मी कम्पोस्ट, नीम खली और जीवाणु खाद का उपयोग कर सकते हैं।

कस्तूरी भिंडी में सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management in Musk Okra)

कस्तूरी भिंडी की फसल को मध्यम सिंचाई की आवश्यकता होती है। बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई आवश्यक होती है ताकि बीजों का अंकुरण ठीक से हो सके। गर्मी के मौसम में 7–10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए, जबकि वर्षा ऋतु में आवश्यकतानुसार ही पानी देना चाहिए।

जलभराव से कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए खेत में उचित जलनिकास की व्यवस्था जरूरी है। फूल और बीज बनने की अवस्था में नमी का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस समय पानी की कमी से उपज घट सकती है।

कस्तूरी भिंडी में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Musk Okra)

प्रारंभिक अवस्था में खरपतवार कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं, क्योंकि वे पोषक तत्वों और नमी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसलिए बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई और 40-45 दिन बाद दूसरी निराई करना लाभकारी रहता है। हाथ से निराई के साथ-साथ हल्की गुड़ाई करने से मिट्टी में वायु संचार भी बेहतर होता है। जैविक तरीकों में मल्चिंग का उपयोग कर खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है।

कस्तूरी भिंडी में कीट और रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control in Musk Okra)

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) में सामान्यतः माहू, फल छेदक और तना छेदक जैसे कीट देखे जाते हैं। ये कीट पौधों की कोमल पत्तियों, फूलों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं। जैविक नियंत्रण के लिए नीम आधारित कीटनाशकों का छिड़काव प्रभावी होता है। रोगों में पत्ती धब्बा, मुरझान और जड़ सड़न प्रमुख हैं।

रोग प्रबंधन के लिए स्वस्थ बीजों का चयन, फसल चक्र अपनाना और जलभराव से बचाव आवश्यक है। आवश्यकता पड़ने पर जैविक या अनुशंसित फफूंदनाशकों का सीमित उपयोग किया जा सकता है।

कस्तूरी भिंडी फूल, फल और बीज उपज (MuskOkra Flower, Fruit, and Seed Yield)

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) के पौधों में बुवाई के लगभग 60–70 दिन बाद फूल आने लगते हैं। फूलों के बाद फल बनते हैं, जिनमें बीज विकसित होते हैं। बीज ही इस फसल का मुख्य आर्थिक उत्पाद होते हैं, क्योंकि इन्हीं से कस्तूरी जैसी सुगंध प्राप्त होती है। जब फल पूरी तरह पक जाएं और सूखने लगें, तब उनकी कटाई की जाती है। समय पर कटाई करने से बीजों की गुणवत्ता बनी रहती है और उनमें सुगंध अधिक होती है।

कस्तूरी भिंडी की कटाई, सुखाना और भंडारण (Harvesting, Drying, and Storage)

फलों की कटाई के बाद उन्हें धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है ताकि नमी पूरी तरह निकल जाए। सूखे फलों से बीज निकालकर छाया में पुनः सुखाया जाता है। बीजों को नमी रहित, ठंडी और हवादार जगह पर संग्रहित करना चाहिए। उचित भंडारण से बीजों की सुगंध और औषधीय गुण लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

कस्तूरी भिंडी की उपज एवं आर्थिक लाभ (MuskOkra Yield and Economic Benefits)

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की औसत बीज उपज लगभग 8–12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है, जो किस्म, जलवायु और खेती की तकनीक पर निर्भर करती है। बाजार में इसके बीजों की कीमत अच्छी मिलती है, क्योंकि इनका उपयोग औषधीय और सुगंध उद्योग में होता है। कम लागत और अच्छे मूल्य के कारण यह फसल किसानों को अच्छा शुद्ध लाभ प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, जैविक तरीके से उगाई गई कस्तूरी भिंडी के बीजों की मांग और कीमत दोनों अधिक होती हैं।

कस्तूरी भिंडी पर निष्कर्ष (Conclusion on Musk Okra)

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की खेती औषधीय एवं सुगंधित फसलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। उचित जलवायु, सही भूमि चयन, संतुलित पोषण और समय पर देखभाल के माध्यम से किसान इस फसल से अच्छा उत्पादन और लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

बढ़ती औषधीय एवं प्राकृतिक उत्पादों की मांग के चलते भविष्य में कस्तूरी भिंडी की खेती के अवसर और भी बढ़ने की संभावना है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों और जैविक उपायों को अपनाएं, तो यह फसल उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

मूषक दाना की खेती कैसे करें?

मूषक दाना (Musk Okra) के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी (पीएच 6-7) और जून-जुलाई का समय उत्तम है, जिसमें नर्सरी तैयार कर बुवाई की जाती है। इसके लिए भरपूर धूप, नियमित पानी और जैविक खाद की आवश्यकता होती है, और फसल लगभग जनवरी तक चलती है, जो औषधीय और सुगंधित गुणों के कारण परफ्यूम उद्योग में महंगी बिकती है, जिससे किसान अच्छा मुनाफा कमाते हैं।

मूषक दाना के लिए कौन-सी जलवायु उपयुक्त है?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) के लिए उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। यह फसल गर्म और हल्की आर्द्र परिस्थितियों में अच्छी तरह बढ़ती है। 20–35 डिग्री सेल्सियस तापमान इसकी वृद्धि के लिए अनुकूल माना जाता है। अधिक ठंड और पाला फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

मूषक दाना के लिए कैसी मिट्टी सबसे अच्छी रहती है?

अच्छी जलनिकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली भारी मिट्टी में इसकी खेती से बचना चाहिए।

मूषक दाना की बुवाई का सही समय क्या है?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की बुवाई फरवरी-मार्च (गर्मी की फसल) तथा जून–जुलाई (खरीफ फसल) में की जाती है। सिंचित क्षेत्रों में फरवरी-मार्च की बुवाई अधिक लाभकारी रहती है, जबकि वर्षा आधारित क्षेत्रों में मानसून के साथ बुवाई की जाती है।

मूषक दाना के लिए बीज दर कितनी होती है?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की खेती के लिए सामान्यत: 8-10 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। स्वस्थ और प्रमाणित बीजों का उपयोग करने से अंकुरण अच्छा होता है और पौधे समान रूप से विकसित होते हैं।

मूषक दाना में खाद और उर्वरक कितना देना चाहिए?

खेत की तैयारी के समय 10-15 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद देना लाभकारी होता है। इसके साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देने से पौधों की वृद्धि और बीज उत्पादन बेहतर होता है। कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की जैविक खेती में वर्मी कम्पोस्ट और नीम खली का उपयोग किया जा सकता है।

मूषक दाना की फसल में सिंचाई कैसे करें?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की बुवाई के बाद हल्की सिंचाई आवश्यक होती है। गर्मी के मौसम में 7–10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। वर्षा ऋतु में आवश्यकतानुसार ही पानी दें और खेत में जलभराव न होने दें।

मूषक दाना में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें है?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई और 40-45 दिन बाद दूसरी निराई करनी चाहिए। इससे खरपतवार नियंत्रित होते हैं और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। मल्चिंग का प्रयोग भी प्रभावी रहता है।

मूषक दाना में प्रमुख कीट और रोग कौन-से हैं?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) में मुख्य रूप से माहू, तना छेदक और फल छेदक कीट लगते हैं। रोगों में पत्ती धब्बा, मुरझान और जड़ सड़न प्रमुख हैं। नीम आधारित कीटनाशक और उचित फसल प्रबंधन से इनका नियंत्रण किया जा सकता है।

मूषक दाना की कटाई कब की जाती है?

बुवाई के लगभग 120–150 दिन बाद जब फल पूरी तरह पक जाएं और सूखने लगें, तब उनकी कटाई की जाती है। कटाई के बाद कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) के फलों को सुखाकर बीज निकाले जाते हैं।

मूषक दाना की औसत उपज कितनी होती है?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) की औसत बीज उपज लगभग 8–12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। उचित देखभाल और वैज्ञानिक तरीकों से उपज और भी बढ़ाई जा सकती है।

क्या कस्तूरी भिंडी को बगीचे में उगाया जा सकता है?

हाँ, कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) को बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है, क्योंकि यह एक गर्म मौसम की फसल है जिसे धूप, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और पर्याप्त गर्मी की आवश्यकता होती है, और इसे सामान्य भिंडी की तरह ही उगाया जाता है, लेकिन इसके बीज सुगंधित होते हैं और अतर उद्योग में काम आते हैं।

कस्तूरी भिंडी के मुख्य उपयोग क्या है?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) एक औषधीय और सुगंधित पौधा है, जिसके बीजों से कस्तूरी जैसी सुगंध आती है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों, इत्र, सुगंधित तेल, पान मसाला, मिठाइयों तथा कुछ खाद्य पदार्थों में किया जाता है। इसके बीज पाचन, हृदय और तंत्रिका तंत्र से संबंधित औषधियों में भी प्रयुक्त होते हैं।

कस्तूरी भिंडी के औषधीय उपयोग क्या है?

कस्तूरी भिंडी (Musk Okra) अपने एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण पेट के कैंसर, पेट दर्द, पाचन समस्याओं, बुखार, खांसी, त्वचा रोगों और जोड़ों के दर्द में फायदेमंद मानी जाती है, और इसके बीज का तेल इत्र और औषधियों में प्रयोग होता है, लेकिन इसका उपयोग चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए। यह हृदय को उत्तेजित करने और तनाव कम करने में भी मदद कर सकती है।

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