
Black Cardamom Cultivation in Hindi: बड़ी इलायची (काली इलायची), जो अपने खास स्वाद और खुशबूदार गुणों के लिए जानी जाती है, यह खाने और पारंपरिक दवाइयों में एक जरूरी भूमिका निभाती है। यह अनोखा मसाला, जो अमोमम सबुलैटम पौधे के बीजों से मिलता है, भारत के उत्तर-पूर्वी इलाकों की नमी वाली और उपजाऊ जलवायु में अच्छी तरह उगता है।
देश और विदेश दोनों जगह इसकी बढ़ती मांग के कारण, किसानों और खेती में दिलचस्पी रखने वालों के लिए बड़ी इलायची (Black Cardamom) की खेती की बारीकियों को समझना जरूरी हो गया है। यह लेख काली इलायची की खेती के अलग-अलग पहलुओं पर गहराई से बात करता है, इसके खेती के तरीकों और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताता है।
बड़ी इलायची के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Black Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की खेती के लिए ठंडी एवं आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसे 10°C से 30°C तापमान की आवश्यकता होती है। अधिक गर्मी या पाला फसल को नुकसान पहुँचा सकता है। वार्षिक वर्षा 1500-3000 मिमी उपयुक्त रहती है। यह समुद्र तल से 600-1200 मीटर (2000-5000 फीट) की ऊँचाई पर अच्छी तरह पनपती है, जहाँ की मिट्टी अम्लीय, ह्यूमस-युक्त और अच्छी जल निकासी वाली हो।
बड़ी इलायची के लिए मिट्टी का चयन (Soil Selection for Black Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की सफल खेती के लिए गहरी, उपजाऊ और जल निकासी वाली दोमट या लेटराइट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की प्रचुरता होनी चाहिए और इसका पीएच स्तर 5.0 से 6.5 या 7.0 के बीच होना आदर्श माना जाता है। पानी का भराव जड़ें सड़ा सकता है, इसलिए अच्छी जल निकासी आवश्यक है।
बड़ी इलायची की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Black Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं जो अधिक उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता रखती हैं। प्रमुख किस्मों में रामसे, गोलसे, सॉनी, वरलांग और भर्लांगे शामिल हैं। रामसे किस्म अधिक उपज और बड़े दानों के लिए जानी जाती है, जबकि गोलसे किस्म जल्दी फल देने वाली होती है। किस्म का चयन क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और बाजार की मांग के अनुसार करना चाहिए, जिससे किसान को अधिक लाभ मिल सके।
बड़ी इलायची की नर्सरी की तैयारी (Preparation of Black Cardamom Nursery)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की पौध नर्सरी में तैयार की जाती है। स्वस्थ और रोगमुक्त पौधों से लिए गए राइजोम या बीज का उपयोग किया जाता है। नर्सरी के लिए छायादार स्थान का चयन करना चाहिए। भूमि को भुरभुरा बनाकर उसमें गोबर की सड़ी खाद मिलाई जाती है। बीजों को 2-3 सेमी गहराई पर बोया जाता है। नियमित सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण से 8-10 महीनों में रोपाई योग्य पौधे तैयार हो जाते हैं।
बड़ी इलायची के लिए खेत की तैयारी (Field Preparation for Large Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) के लिए खेत की तैयारी करते समय सबसे पहले भूमि की गहरी जुताई की जाती है। इसके बाद 2-3 बार हल्की जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है। खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था होना आवश्यक है। प्रति हेक्टेयर 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत तैयार किए जाते हैं, जिससे मिट्टी का कटाव न हो और नमी बनी रहे।
बड़ी इलायची की रोपण विधि और समय (Black Cardamom Planting Method)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की रोपाई वर्षा ऋतु में जून से जुलाई के बीच करना सर्वोत्तम रहता है। पौधों को तैयार गड्ढों में सावधानीपूर्वक लगाया जाता है। गड्ढों का आकार लगभग 45×45×45 सेमी होना चाहिए। रोपण के बाद पौधों के चारों ओर मिट्टी को अच्छी तरह दबा दिया जाता है। छायादार वृक्षों के नीचे रोपाई करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है।
बड़ी इलायची की बीज दर और पौध दूरी (Black Cardamom Seed Rate and Spacing)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की खेती में बीज दर किस्म एवं क्षेत्र के अनुसार बदलती है। सामान्यतः प्रति हेक्टेयर 800-1000 पौधों की आवश्यकता होती है। पौधों की दूरी 2×2 मीटर या 2.5×2.5 मीटर रखी जाती है। उचित दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व, धूप और हवा मिलती है, जिससे रोगों की संभावना कम होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।
बड़ी इलायची के लिए खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizers for Black Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की अच्छी उपज के लिए संतुलित खाद और उर्वरक प्रबंधन आवश्यक है। प्रति पौधा 5-10 किलोग्राम गोबर की खाद प्रति वर्ष देना चाहिए। इसके अतिरिक्त नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की अनुशंसित मात्रा दो या तीन भागों में दी जाती है। जैविक खाद जैसे वर्मी कम्पोस्ट और नीम खली का उपयोग फसल की गुणवत्ता बढ़ाता है। उर्वरक देने के बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें।
बड़ी इलायची के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Large Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन नमी बनी रहना जरूरी है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। शुष्क मौसम में 15-20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। जलभराव से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं, इसलिए उचित जल निकास अनिवार्य है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने से पानी की बचत होती है और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है।
बड़ी इलायची में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Large Cardamom)
खरपतवार फसल से पोषक तत्व, पानी और प्रकाश छीन लेते हैं, जिससे उत्पादन घटता है। बड़ी इलायची (Black Cardamom) के खेत में वर्ष में 2–3 बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। हाथ से खरपतवार निकालना सबसे सुरक्षित तरीका है। सूखी पत्तियों या घास से मल्चिंग करने पर खरपतवार कम उगते हैं और मिट्टी की नमी बनी रहती है। रासायनिक खरपतवारनाशी का प्रयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
बड़ी इलायची में रोग और कीट नियंत्रण (Disease Control in Black Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) में तना सड़न, पत्ती धब्बा और वायरल रोग प्रमुख हैं। कीटों में शूट बोरर और थ्रिप्स नुकसान पहुँचाते हैं। रोगग्रस्त पौधों को तुरंत हटा देना चाहिए। जैविक कीटनाशकों जैसे नीम तेल का छिड़काव लाभदायक होता है। फफूंदनाशकों का प्रयोग रोग की गंभीरता के अनुसार किया जाता है। संतुलित पोषण और स्वच्छ खेती अपनाने से रोगों का प्रकोप कम होता है।
बड़ी इलायची फसल की देखभाल (Large Cardamom Crop Care)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की फसल की नियमित देखभाल से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ती हैं। सूखी और रोगग्रस्त पत्तियों को समय-समय पर हटाना चाहिए। छायादार वृक्षों की छंटाई कर उचित प्रकाश व्यवस्था बनाए रखें। मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं। खेत की साफ-सफाई और समय पर खाद-पानी देने से फसल स्वस्थ रहती है और लंबे समय तक उत्पादन देती है।
बड़ी इलायची में फूल आना और फल विकास (Flowering and Fruit in Black Cardamom)
रोपाई के लगभग 2-3 वर्ष बाद बड़ी इलायची (Black Cardamom) में फूल आना शुरू होता है। फूल जमीन के पास गुच्छों में लगते हैं। परागण के बाद फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। फल धीरे-धीरे विकसित होकर पूर्ण आकार लेते हैं। इस समय पर्याप्त नमी और पोषक तत्व आवश्यक होते हैं। फूल और फल अवस्था में किसी भी प्रकार का तनाव उत्पादन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए विशेष ध्यान देना चाहिए।
बड़ी इलायची की कटाई का सही समय (Right Time for Harvesting Black Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की कटाई तब की जाती है जब फल पूरी तरह विकसित हो जाएँ और उनका रंग गहरा भूरा हो जाए। अधपके फल काटने से गुणवत्ता खराब होती है। कटाई आमतौर पर अगस्त से नवंबर के बीच की जाती है। फलों को हाथ से सावधानीपूर्वक तोड़ा जाता है ताकि पौधे को नुकसान न पहुँचे। सही समय पर कटाई करने से दानों की सुगंध और वजन दोनों बेहतर होते हैं।
बड़ी इलायची की सुखाने और प्रसंस्करण विधि (Processing Method of Large Cardamom)
कटाई के बाद बड़ी इलायची (Black Cardamom) को सुखाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। पारंपरिक भट्टियों या आधुनिक ड्रायर का उपयोग किया जाता है। सुखाने की प्रक्रिया में तापमान 45-60°C रखा जाता है। सही ढंग से सुखाने पर इलायची का रंग, सुगंध और गुणवत्ता बनी रहती है। अधिक तापमान से दाने जल सकते हैं। सुखाई पूरी होने पर दानों में नमी लगभग 10-12 प्रतिशत रहनी चाहिए।
बड़ी इलायची का भंडारण (Storage of Black Cardamom)
सुखाई के बाद बड़ी इलायची (Black Cardamom) को ठंडे, सूखे और हवादार स्थान पर संग्रहित करना चाहिए। नमी और कीटों से बचाव के लिए एयरटाइट बैग या लकड़ी के बक्सों का उपयोग किया जाता है। भंडारण कक्ष में तापमान और आर्द्रता नियंत्रित होनी चाहिए। समय-समय पर भंडारित माल की जांच करनी चाहिए। उचित भंडारण से काली इलायची की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है।
बड़ी इलायची का उत्पादन और उपज (Production and Yield of Large Cardamom)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की उपज किस्म, जलवायु और देखभाल पर निर्भर करती है। सामान्यतः एक हेक्टेयर से 200-400 किलोग्राम सूखी काली इलायची प्राप्त की जा सकती है। अच्छी प्रबंधन पद्धतियों से यह उपज और अधिक हो सकती है। पौधे 10-15 वर्षों तक उत्पादन देते हैं। नियमित देखभाल और रोग प्रबंधन से स्थिर और उच्च उपज प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की खेती के लिए 10-35°C तापमान, 1500-4000 मिमी वर्षा और छायादार, जल निकासी वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी उपयुक्त है। यह 2-3 साल में फसल देती है, जो 1000-4000 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिकती है। इसकी खेती के लिए जुलाई में रोपाई करना और अच्छी किस्म (जैसे रामला, गोलसाई) का चयन करना सबसे अच्छा होता है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) के लिए ठंडी, नम और छायादार जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। इसे अत्यधिक गर्मी और पाले से नुकसान होता है। 10 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 1500 से 3000 मिमी वार्षिक वर्षा इसकी अच्छी वृद्धि और उत्पादन के लिए आदर्श मानी जाती है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की खेती के लिए जैविक पदार्थों से भरपूर, अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली मिट्टी में पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की रोपाई वर्षा ऋतु में जून से जुलाई के बीच करना सबसे उपयुक्त होता है। इस समय पर्याप्त नमी उपलब्ध रहती है, जिससे पौधे अच्छी तरह स्थापित हो जाते हैं। रोपाई छायादार स्थान पर करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की प्रमुख उन्नत किस्मों में रामसे, गोलसे, सॉनी, वरलांग और भर्लांगे शामिल हैं। ये किस्में अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और कुछ हद तक रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती हैं। किस्म का चयन क्षेत्र की जलवायु के अनुसार करना चाहिए।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) में तना सड़न (राइजोम रॉट) रोग सबसे प्रमुख और हानिकारक माना जाता है। यह रोग फफूंद के कारण होता है और अधिक नमी में तेजी से फैलता है। समय पर जल निकास और रोगग्रस्त पौधों को हटाने से नियंत्रण संभव है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) का पौधा रोपाई के लगभग 2 से 3 वर्ष बाद फूल और फल देना शुरू करता है। प्रारंभिक वर्षों में पौधों की उचित देखभाल आवश्यक होती है। सही पोषण और जल प्रबंधन से पौधे लंबे समय तक अच्छा उत्पादन देते हैं।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की कटाई तब की जाती है जब फल पूरी तरह विकसित हो जाते हैं। कटाई के बाद फलों को 45-60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भट्टी या ड्रायर में सुखाया जाता है। सही सुखाने से इलायची की सुगंध, रंग और गुणवत्ता बनी रहती है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की औसत उपज किस्म, जलवायु और प्रबंधन पर निर्भर करती है। सामान्यतः एक हेक्टेयर क्षेत्र से 200 से 400 किलोग्राम सूखी बड़ी इलायची प्राप्त होती है। उन्नत तकनीक और उचित देखभाल से उपज में वृद्धि संभव है।
हाँ, बड़ी इलायची (Black Cardamom) को घर के बगीचे या गमलों में उगाया जा सकता है, विशेषकर यदि आपके पास नम और आंशिक छायादार स्थान उपलब्ध है। इसके लिए उपजाऊ मिट्टी, नमी (75% आर्द्रता), और 10°C से 35°C तापमान आदर्श माना जाता है, और यह पौधा रोपण के 2-3 साल बाद फल देना शुरू कर सकता है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) की खेती मुख्य रूप से व्यावसायिक मसालों के उत्पादन, औषधीय उपयोग, और पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने के लिए की जाती है। यह एक नकदी फसल है जो भोजन में स्वाद व सुगंध बढ़ाने, तेल निकालने, और चाय/आयुर्वेदिक दवाओं में प्रयुक्त होती है, जिसके लिए इसकी भारी मांग है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom), पाचन में सुधार, श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने, मुंह के संक्रमण को दूर करने और सूजन कम करने जैसी औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके बीजों का उपयोग पेट फूलना, गैस, मुंह की दुर्गंध, खांसी, अस्थमा और खराब भूख के इलाज में किया जाता है, जो मुख्य रूप से भूख बढ़ाने (दीपन) और पाचन (पाचन) में सहायक है।





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