
How to Grow Yellow Asparagus in Hindi: औषधीय पीली शतावरी, जो अपने अनोखे स्वाद और कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाती है, यह खेती और खाने दोनों में एक मूल्यवान चीज के तौर पर ध्यान खींच रही है। यह बहुमुखी पौधा, जो विटामिन, मिनरल और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर है, सदियों से पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होता रहा है और अब आधुनिक हर्बल दवाओं में इसकी क्षमता को पहचाना जा रहा है।
जैसे-जैसे किसान अपनी फसलों में विविधता लाना चाहते हैं और औषधीय पौधों के बढ़ते बाजार का फायदा उठाना चाहते हैं, पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती की तकनीकों, आदर्श बढ़ती परिस्थितियों और आर्थिक संभावनाओं को समझना और भी जरूरी हो जाता है। यह लेख भारत में औषधीय पीली शतावरी की खेती के कई पहलुओं की पड़ताल करता है।
पीली शतावरी के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Yellow Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की फसल विभिन्न कृषि मौसम स्थितियों के तहत उग सकती है। शतावरी सूखे के साथ-साथ न्यूनतम तापमान के प्रति भी वहनीय है। इसकी खेती 10 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में की जा सकती है और इसके पौधे और जड़ों की विकास के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान सही माना जाता है। इसे उपोष्णकटिबंधीय और सम-शीतोष्ण कृषि जलवायु क्षेत्रों में 1400 मीटर तक आसानी से उगाया जा सकता है।
पीली शतावरी के लिए भूमि का चयन (Soil Selection for Yellows Asparagus)
आमतौर पर पीली शतावरी की खेती विभिन्न प्रकारकी मिट्टी में कर सकते है, जैसे की काली मिट्टी, मध्यम काली, लाल दोमट, चिकनी मिट्टी, चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी जिनका पीएच मान 7-8 हो, इलेक्ट्रिक कान्डक्टिविटी 0.15, जैविक कार्बन 0.79% और फास्फोरस 7.3 किलोग्राम प्रति एकड़ हो।
खेत में पिछले 10 सालों से शतावरी (Yellow Asparagus) न उगाई गई हो, भरपूर धूप आती हो, और गहरी, ढीली मिट्टी हो ताकि जड़ें गहराई तक फैल सकें, क्योंकि यह एक बार लगने के बाद कई सालों तक चलती है।
पीली शतावरी के लिए भूमि की तैयारी (Land Preparation for Yellow Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती में भूमि की अच्छी तैयारी करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह जमीन के अंदर होती है जिससे जमीन को अच्छी तरह से भुरभुरी बनाया जाना आवश्यक है। जमीन की 1.5 फुट गहरी जुताई करें, उसमे जैविक खाद को समान मात्रा में फैलाए।
उसके बाद मिट्टी और खाद को मिलाए हुए मिट्टी को बारीक/ भुरभुरा बनाएं। जो लंबी अवधि की फसल के लिए जरूरी है, और इससे जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं।
पीली शतावरी की पौध लगाने का समय (Yellows Asparagus Planting Time)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की पौध लगाने का सबसे अच्छा समय वसंत ऋतु (फरवरी-मार्च या अप्रैल) है, खासकर जब मिट्टी का तापमान बढ़ना शुरू हो, लेकिन भारत में जून-जुलाई (बरसात का मौसम) भी एक अच्छा विकल्प है, जब पर्याप्त नमी और उर्वरता हो।
ठंडे क्षेत्रों में देर से शरद ऋतु (सितंबर) में भी लगा सकते हैं, लेकिन शुरुआती वसंत सबसे अच्छा होता है। लेकिन अगर जमीन अच्छी उपजाऊ है और पानी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, तो आप इसकी खेती किसी भी महीने से शुरू कर सकते सकते है।
पीली शतावरी के बीज का उपचार (Treatment of Yellow Asparagus Seeds)
पीली शतावरी के पौधे या जड़ों को तैयार जमीन में लगाने के पहेले उसे उपचारित करना जरूरी है। एक बरतन में 10 लीटर पनि ले, उसमे 2 लीटर गोमूत्र और 100 ग्राम ट्रायकोडर्मा पाउडर मिलाए। घोल में शतावरी के जड़ों को 5 से 10 मिनट तक रखे और उसमे से निकाल कर जमीन में लगाए।
तैयार पौधे की जड़ों को जमीन में तय दूरी और जगह पर गाढ़ दे। पीली शतावरी (Yellow Asparagus) के पौधे पूरे खेत में लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करे।
पीली शतावरी के बीज या पौध का चुनाव (Selection of Yellow Asparagus Seedlings)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती में इसे जड़ या बीजों द्वारा संचरण किया जाता है। व्यावसायिक खेती की अगर बात करे तो शतावरी को बीज की तुलना में उसके जड़ चूषकों को प्राधान्य दिया जाता है, जिसका कारण जड़ों से पौधा जल्दी बनता है और उसकी कटाई बीजों की खेती की तुलना में जल्दी होती है। जमीन में लगाए जाने वाले पौधे में कम से कम 2-3 जड़े चूषक होनी जरूरी है।
पीली शतावरी के पौधरोपण की विधि (Method of Planting Yellow Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) को समतल जमीन पर और बेड बनाकर भी लगाया जा सकता है। शतावरी झाड़ीनुमा और काँटेदार पौधा होता है, इस लिए इसको लगाने का सबसे प्रचलित तरीका समतल जमीन पर पौधे को लगाना है जिससे बेड बनाने के खर्चे से भी बच सकता है।
दूसरे तरीके में समतल मिट्टी में 2 फुट चौड़े बेड या मेड का निर्माण करे, जिसकी ऊंचाई 1 फुट तक हो। शतावरी के खेती में बेड के ऊपर ढकने के लिए प्लास्टिक की मलचींग शीट का उपयोग करने से खरपतवार निकालने के खर्चे में कमी आ सकती है।
उसके साथ ही सिंचाई के लिए बूंद-बूंद सिंचाई यानि ड्रिप इरगैशन सिस्टम के इस्तेमाल से काफी मात्रा में पानी की एंव खर्चे की बचत के साथ साथ उत्पादन में भी 15-25% बढ़ोतरी देखी गई है। शतावरी के जड़ों को 2 x 2 फुट की दूरी पर लगाया जाता है। इसमे पौध से पौधे की दूरी 2 फुट और दो लाइन के बीच 2 फुट की दूरी होती है। इस अनुसार एक एकड़ में 12,000 पौधे लगाए जाते है।
पीली शतावरी के लिए खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizers for Yellow Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती में जैविक खादों एंव उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए, जैविक खाद, जैसे-
केचुवे का खाद / वर्मिकोमपोस्ट: पौधे के लिए पोशाक तत्व प्रदान कर्ता है।
नीम की खली: जमीन में उपस्थित किट कों को मारता है।
जिप्सम पाउडर: जमीन को भुरभुरा रखने में मदद करता है।
ट्रायकोडर्मा फफूंद नाशक पाउडर: जो जमीन में उपस्थित हानिकारक फफूंद को मारने में उपयोगी होता है।
विशेष: ये चारों खाद भूमि तैयार करते समय खेत में फैलाने है।
पीली शतावरी के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Yellow Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती में एक माह तक नियमित रूप से 4-6 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जानी चाहिए और इसके बाद साप्ताहिक अंतराल पर सिंचाई की जानी चाहिए। सिंचाई के दौरान या बाद में जमीन में पानी जमा ना होने दे। बारिश के पानी को जल्द से जल्द खेत से बहर निकाल दे।
लेकिन ध्यान रहे पौधे के जड़ों के पास हर समय नमी होनी जरूरी है। आपके जमीन की पानी धारण क्षमता एंव मौसम के अनुसार पानी देने की आवश्यकता में बदलाव हो सकता है।
पीली शतावरी में निंदाई और गुड़ाई (Weeding and Hoeing in Yellows Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) वृद्धि के आरंभिक समय के दौरान नियमित रूप से खरपतवार निकाली जानी चाहिए। खरपतवार निकालते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि बढ़ने वाले पौधों को किसी प्रकार का नुकसान न हो। फसल को खरपतवार से मुक्त रखने के लिए लगभग 6-8 बार हाथ से खरपतवार निकालने की जरूरत होती है।
पहली निंदाई बुआई के 60-80 दिनों बाद तथा दूसरी निंदाई इसके एक माह बाद करना चाहिए। किन्तु यदि खरपतवार पहले ही आ जाते है तथा ऐसा लगता है कि फसल प्रभावित हो रही है, तो इसके पहले भी एक निंदाई की जा सकती है। इसके साथ ही साथ समय- समय पर गुड़ाई भी करते रहना चाहिए जिससे वायु संचार अच्छा हो सके।
पीली शतावरी में रोग और किट नियंत्रण (Disease and Pest Control in Yellow Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) के खेती के दौरान चुनिंदा रोग और किट देखने के लिए मिलते है, जैसे-
जड़ों में गलन: पनि की मात्रा जड़ होने और फफूंद के कारण यह रोग होता है।
जड़ों की फफूंद: जमीन में उपस्थित पूर्व वानस्पतिक अवशेस कूजने से इस फफूंद का प्रादुर्भाव देखा जा सकता है।
ऊपरी पत्तों पे कूँगी: इस बीमारी से पत्तों पर भूरे रंग के धब्बे पद जाते है, जिससे पत्ते सुख जाते है।
इन रोगो को छोड़ पीली शतावरी (Yellow Asparagus) में दूसरे रोगों का असर नहीं के बराबर होता।
पीली शतावरी की खुदाई और उपज (Harvesting and Yield of Yellow Asparagus)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की फसल 16 महीने में खोदने लायक हो जाती हैं, खुदाई करते समय ध्यान रखे की इसके जड़े न कटे, न छिले और न ही भूमि में रहे। वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर भारत के अनेक राज्यों में किसान इस समय प्रति पौध 5 से 7 किलो जड़ों का उत्पादन भी ले रहे है।
सामान्यत: शतावरी की पैदावार प्रति पौधा 1 से 2 किलो गीली जड़े मानकर भी चले तो लगभग 12000 से 14000 किलो (12-14 टन) गीली जड़े प्रति एकड़ प्राप्त हो जाती है। यह ध्यान रहे कि गीले जड़ों को छील कर सूखाने के बाद 15-20 प्रतिशत तक रह जाती है। इस प्रकार एक एकड़ में कम से कम 1500 से 2000 किलो सुखी जड़े प्राप्त होती है।
पीली शतावरी की कटाई पश्चात विधि (Post-Harvesting Method for Yellow Asparagus)
शतावरी के जड़ों को जमीन से निकाल कर उनको साफ पानी से धोया जाता है और उसके बाद उनका ऊपरी छिलका निकाला जाता है। छिलका उतारने के लिए जड़ों को पनि के साथ 5-10 सेकंद उबाला जाता है। या बड़े से बर्तन में पनि लेके जड़ों को भांप दी जाती है और उससे छिलका निकाल जाता है, हालांकि इसका छिलका आसानी से निकाला जा सकता है।
जड़ों का छिलका निकालने के बाद उनको छाँवनुमा जगह पर जहा हवा का आवागमन हो वहाँ सुखाने के लिए डाला जाता है। आमतौर पर 7-8 दिन में पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की जड़े पूरी तरह से सुख जाती है। जड़ें सुखाने पश्चात उनको साफ बोरियों में बाजार ले जाने के लिए भरा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली, उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है, जिसमें मई-जून में गहरी जुताई के बाद गोबर की खाद मिलाकर ऊँची मेड़ें (60×60 सेमी) बनाई जाती हैं। अप्रैल-मई में नर्सरी में बीज बोकर, 45 सेमी ऊँचा होने पर, मानसून (जून-सितंबर) में रोपाई की जाती है, जिसमें पहले 2 साल कटाई नहीं होती और तीसरे साल से जड़ें खोदकर निकाली जाती हैं, जिसके लिए अच्छी सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण जरूरी है।
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। 15-25°C तापमान अच्छा रहता है। अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक पदार्थ भरपूर हों और पीएच 6.5-7.5 के बीच हो, इसकी सफल खेती के लिए आदर्श होती है।
इसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर या फरवरी से मार्च के बीच की जाती है। बीज या क्राउन (जड़युक्त पौधा) दोनों से पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती संभव है। पौधों को 30-45 सेमी की दूरी पर मेड़ों में लगाया जाता है और ऊपर से मिट्टी चढ़ाकर ढक दिया जाता है, ताकि प्रकाश न पहुँचे और डंठल पीले रहें।
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) के खेत की तैयारी के समय गोबर की सड़ी खाद 20-25 टन प्रति हेक्टेयर डालना लाभकारी होता है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश संतुलित मात्रा में दें। हल्की लेकिन नियमित सिंचाई आवश्यक है, क्योंकि अधिक पानी से जड़ सड़न की समस्या हो सकती है। नमी बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) में मुख्य रूप से शतावरी भृं (सामान्य और चित्तीदार), एफिड्स और इल्लियाँ जैसे कीट लगते हैं, जो पत्तियों और कलियों को खाकर नुकसान पहुँचाते हैं, और रस्ट तथा फ्यूजेरियम तना सड़न जैसे रोग होते हैं, जो पौधों को पीला कर देते हैं और उपज कम करते हैं, जिससे पौधे कमजोर होकर सूखने लगते हैं और पीले धब्बे पड़ जाते हैं।
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की बुवाई के लगभग 18-24 महीनों बाद पहली व्यावसायिक कटाई शुरू होती है। जब डंठल 15-20 सेमी लंबे हो जाएँ और जमीन से बाहर आने से पहले हों, तब उन्हें काट लिया जाता है। एक बार स्थापित होने के बाद यह फसल 8-10 वर्षों तक उत्पादन दे सकती है और अच्छा मुनाफा देती है।
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) मूल रूप से वही शतावरी है जिसे सूर्य के प्रकाश से दूर उगाया जाता है। धूप न मिलने के कारण इसमें हरितलवक (क्लोरोफिल) नहीं बनता, जिससे इसका रंग पीला या सफेद रहता है। इसका स्वाद हरी शतावरी की तुलना में हल्का, कम कड़वा और अधिक मुलायम होता है, इसलिए यह बाजार में ज्यादा महंगी बिकती है।
हाँ, पीली शतावरी (Yellow Asparagus) को बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है, बशर्ते मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली, उपजाऊ और धूप वाली जगह हो; यह एक बार लगने पर कई सालों तक फसल देती है, लेकिन धैर्य और सही देखभाल की जरूरत होती है, खासकर शुरुआत के 2-3 सालों में जब तक फसल के लिए जड़ें मजबूत न हो जाएं।
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) की खेती मुख्य रूप से औषधीय उद्देश्यों के लिए की जाती है, क्योंकि इसकी जड़ों में बलवर्धक, पौरुषवर्धक (पुरुषों के लिए), दुग्धवर्धक (महिलाओं के लिए), और पोषक तत्वों से भरपूर गुण होते हैं, जिनका उपयोग आयुर्वेदिक, सिद्धा और होम्योपैथिक दवाओं के निर्माण में होता है, जैसे कि गैस्ट्रिक अल्सर, पाचन और तंत्रिका संबंधी विकारों के इलाज के लिए।
पीली शतावरी (Yellow Asparagus) के कई औषधीय लाभ हैं, जिनमें मुख्य रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, पाचन सुधारना, तनाव कम करना, महिला प्रजनन स्वास्थ्य का समर्थन करना, और शरीर को ऊर्जा प्रदान करना शामिल है, जो इसे एक बेहतरीन एडाप्टोजेन और पोषक तत्वों का स्रोत बनाता है, खासकर दूध बढ़ाने और पेट के अल्सर व किडनी स्टोन जैसी समस्याओं में उपयोगी है।





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