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Valerian Farming in Hindi: जाने तगर की खेती कैसे करें

January 29, 2026 by Bhupendra Dahiya Leave a Comment

Valerian Farming in Hindi: जाने तगर की खेती कैसे करें

How to Grow Valerian in Hindi: प्राकृतिक उपचार और हर्बल प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग के कारण तगर की खेती लोकप्रिय हो रही है। जिससे सुगंधबाला और मुश्कबाला के नाम से भी जाना जाता है। तगर, जो अपने शांत करने वाले गुणों और पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल के लिए जाना जाता है, का भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद में एक समृद्ध इतिहास है।

जैसे-जैसे ज्यादा किसान टिकाऊ खेती के तरीकों को अपना रहे हैं, इस औषधीय जड़ी-बूटी की खेती आर्थिक विकास और विविधीकरण के लिए एक अनोखा अवसर प्रदान करती है। यह लेख तगर (Valerian) की खेती के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से चर्चा करता है, जिसमें खेती के लिए आदर्श स्थितियाँ, खेती की तकनीकें और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियाँ शामिल हैं।

Table of Contents

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  • तगर के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Valerian)
  • तगर के लिए मिट्टी का चयन (Soil Selection for Valerian)
  • तगर की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Valerian)
  • तगर के लिए प्रवर्धन की विधियाँ (Propagation Methods for Valerian)
  • तगर के लिए नर्सरी प्रबंधन (Nursery Management for Valerian)
  • तगर के लिए खेत की तैयारी (Field Preparation for Valerian)
  • तगर की बुवाई का समय और विधि (Sowing Time and Method for Valerian)
  • तगर के लिए पौधों की दूरी (Plant Spacing for Valerian)
  • तगर के लिए खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizers for Valerian)
  • तगर के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Valerian)
  • तगर के लिए खरपतवार नियंत्रण (Weed Control for Valerian)
  • तगर में रोग एवं कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control in Valerian)
  • तगर की फसल की अवधि (Valerians crop duration)
  • तगर की खुदाई और कटाई (Excavation and harvesting of Tagar)
  • तगर की खेती से उपज (Yield from Tagar cultivation)
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

तगर के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Valerian)

तगर (Valerian) की खेती के लिए ठंडी और नमीयुक्त जलवायु आदर्श है। यह मुख्यतः 1000-3000 मीटर ऊँचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में उगाई जाती है। अत्यधिक गर्म या अत्यधिक ठंडी जलवायु जड़ों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। वर्षा पर्याप्त होनी चाहिए, लेकिन जलभराव से बचाव आवश्यक है। धूप और छाया का संतुलन पौधों के स्वास्थ्य और जड़ की गुणवत्ता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

तगर के लिए मिट्टी का चयन (Soil Selection for Valerian)

तगर (Valerian) के लिए ढीली, उपजाऊ और जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त होती है। हल्की दोमट मिट्टी में जड़ अच्छी तरह विकसित होती है। भूमि का पीएच 6.0-7.5 आदर्श माना जाता है। भारी मिट्टी और जलभराव वाली भूमि जड़ों के सड़ने का कारण बन सकती है। ढलान वाली भूमि में पानी निकासी अच्छी रहती है। खेत को अच्छी तरह जुताई कर गोबर या कम्पोस्ट मिलाकर उर्वर बनाया जाता है।

तगर की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Valerian)

तगर (Valerian) की खेती में उन्नत किस्में उपज और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उपयोग होती हैं। ये किस्में लंबी जड़, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और तेज वृद्धि के लिए विकसित की जाती हैं। स्थानीय किस्में भी उपलब्ध हैं, लेकिन उन्नत किस्में व्यावसायिक खेती के लिए अधिक लाभदायक होती हैं। इनकी जड़ अधिक तेलयुक्त और औषधीय गुणों में समृद्ध होती है। सही किस्म का चयन उत्पादन और आय दोनों बढ़ाने में मदद करता है।

तगर के लिए प्रवर्धन की विधियाँ (Propagation Methods for Valerian)

तगर (Valerian) की खेती में दो मुख्य प्रवर्धन विधियाँ हैं। बीज द्वारा: इसमें पौधे धीरे बढ़ते हैं और समय लगता है। राइजोम या जड़ के टुकड़ों द्वारा: यह सबसे अधिक प्रभावी और व्यावसायिक तरीका है। राइजोम से सीधे खेत में रोपाई की जाती है। जड़ द्वारा प्रवर्धन से पौधों की वृद्धि तेज होती है और औषधीय गुणवत्ता भी अधिक रहती है। सही विधि चयन उपज और लागत को प्रभावित करती है।

तगर के लिए नर्सरी प्रबंधन (Nursery Management for Valerian)

नर्सरी में तगर (Valerian) की बीज या राइजोम से पौध तैयार होते हैं। मिट्टी को गोबर या कम्पोस्ट मिलाकर तैयार किया जाता है। पतली क्यारियों में बुवाई की जाती है और हल्की छाया या छायादान देना आवश्यक है। नियमित पानी देना जरूरी है, लेकिन जलभराव से बचाव करना चाहिए। पौधों को मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर हल्की खाद या जैविक उर्वरक भी डालना चाहिए। नर्सरी में स्वस्थ पौध व्यापारिक खेती की नींव होते हैं।

तगर के लिए खेत की तैयारी (Field Preparation for Valerian)

तगर (Valerian) के लिए खेत को अच्छी तरह जुताई और गहरी हल चलाकर ढीला करना जरूरी है। खेत की सतह समतल रखें ताकि जल निकासी सही रहे। मिट्टी में गोबर या कम्पोस्ट मिलाकर उपजाऊ बनाया जाता है। पत्थर या बड़े कचरे हटाने चाहिए। हल्की जुताई खरपतवार नियंत्रण में मदद करती है। खेत तैयार करने के बाद, इसे 15-20 दिन के लिए छोड़ देना चाहिए, जिससे मिट्टी समतल और तैयार हो जाए, और पौधों की जड़ अच्छे से बढ़ सके।

तगर की बुवाई का समय और विधि (Sowing Time and Method for Valerian)

तगर (Valerian) की बुवाई/रोपाई का समय मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर है। यह समय ठंड या वर्षा के पहले उपयुक्त माना जाता है। बीज से बोने पर क्यारियों में पतली परत डालें। राइजोम के टुकड़े सीधे खेत में रोपाई करें। रोपाई में पौधों को 25-30 सेमी गहरे डालें। बुवाई/रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें और मिट्टी को ढककर नमी बनाए रखें। सही समय से बोने पर जड़ गुणवत्ता और उपज बेहतर होती है।

तगर के लिए पौधों की दूरी (Plant Spacing for Valerian)

पौधों की सही दूरी तगर (Valerian) की अच्छी वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। पंक्ति में दूरी 30-40 सेमी और पौधों के बीच 20-30 सेमी रखें। इससे पौधों को पर्याप्त हवा, पोषक तत्व और धूप मिलती है। तंग रोपाई से जड़ें आपस में उलझ सकती हैं और पौधे कमजोर हो सकते हैं। पौधों की सही दूरी से रोग और कीट कम लगते हैं और उपज भी बढ़ती है।

तगर के लिए खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizers for Valerian)

तगर (Valerian) के लिए जैविक खाद (गोबर/कम्पोस्ट) 20-25 टन प्रति हेक्टेयर आवश्यक है। रासायनिक उर्वरक में एनपीके अनुपात 20:10:10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयोगी है। रोपाई से पहले मिट्टी में खाद मिलाएं। उर्वरक पौधों की वृद्धि और जड़ की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई के साथ उर्वरक डालें। जैविक खाद और रासायनिक उर्वरक का संतुलित प्रयोग फसल की आय और स्थायित्व के लिए लाभदायक है।

तगर के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Valerian)

तगर (Valerian) को नियमित लेकिन अत्यधिक जल से बचाकर पानी देना चाहिए। बारिश वाले क्षेत्रों में केवल जब मिट्टी सुख जाए, तब हल्की सिंचाई करें। जलभराव से जड़ सड़ सकती है। सिंचाई का समय सुबह या शाम करें। नर्सरी और खेत दोनों में पानी का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सही सिंचाई से जड़ मजबूत, पौधे स्वस्थ और उपज अधिक होती है।

तगर के लिए खरपतवार नियंत्रण (Weed Control for Valerian)

खरपतवार तगर (Valerian) के विकास में बाधक हैं। मुल्चिंग से अधिकांश खरपतवार नियंत्रित होते हैं। आवश्यकता पड़ने पर हल्की जुताई या हाथ से निकालें। रासायनिक निरोधक कम उपयोगी हैं और जैविक खेती में हानिकारक हो सकते हैं। समय-समय पर खेत की सफाई से पौधों के लिए पोषक तत्व अधिक उपलब्ध रहते हैं। सही नियंत्रण से उपज और जड़ की गुणवत्ता बेहतर होती है।

तगर में रोग एवं कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control in Valerian)

तगर (Valerian) में प्रमुख रोग हैं: जड़ सड़न और पत्ती पीलापन। कीटों में घोंघे और अन्य कीड़े शामिल हैं। नियंत्रण के लिए जल निकासी बनाए रखें और रोगग्रस्त पौधों को तुरंत निकालें। जैविक कीटनाशक जैसे नीम का तेल प्रयोग करें। समय पर निगरानी करने से फसल को नुकसान कम होता है। रोग और कीट नियंत्रण उपज और औषधीय गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

तगर की फसल की अवधि (Valerians crop duration)

तगर (Valerian) की फसल लगभग 180-210 दिन में कटाई के लिए तैयार होती है। समय मौसम, ऊँचाई और मिट्टी की स्थिति पर थोड़ी बदल सकती है। इस अवधि में पौधों की जड़ पूरी तरह विकसित हो जाती है। सही समय पर कटाई से जड़ का औषधीय गुण और तेल सामग्री अधिक रहती है। फसल की अवधि के अनुसार सिंचाई, खाद और कीट नियंत्रण की योजना बनाना आवश्यक है।

तगर की खुदाई और कटाई (Excavation and harvesting of Tagar)

तगर (Valerian) की जड़ को ध्यानपूर्वक खोदें, ताकि राइजोम क्षतिग्रस्त न हो। पत्तियों और तने को अलग करें। जड़ को साफ करके धूप या छायादार जगह पर सुखाएँ। कटाई के समय जड़ की मोटाई और गुणवत्ता पर ध्यान दें। सही तरीके से खुदाई और सुखाने से जड़ की औषधीय क्षमता बनी रहती है। कटाई के बाद जड़ को सही तरीके से संग्रहित करना लाभकारी होता है।

तगर की खेती से उपज (Yield from Tagar cultivation)

तगर (Valerian) की औसत ताजा जड़ की उपज 10-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। सुखाने पर यह लगभग 3-4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह जाती है। उच्च गुणवत्ता वाली जड़ बाजार में अधिक मूल्य पर बिकती है। उपज मिट्टी, जलवायु, किस्म और खेती प्रबंधन पर निर्भर करती है। अच्छी खेती से किसान को लाभ और औषधीय बाजार में प्रतिस्पर्धा मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

तगर क्या है?

तगर (Valerian) एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है। इसे अंग्रेजी में इंडियन वैलेरियन कहा जाता है। इसकी जड़ों का उपयोग अनिद्रा, तनाव, चिंता, मानसिक अशांति और तंत्रिका संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता है।

तगर कैसे उगाएं?

तगर (Valerian) उगाने के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई मिट्टी उपयुक्त होती है। इसकी रोपाई फरवरी-मार्च या जून-जुलाई में की जाती है। पौध या जड़ कटिंग लगाकर हल्की सिंचाई करें। समय-समय पर निराई-गुड़ाई और जैविक खाद देने से पौधे स्वस्थ रहते हैं। 12-15 महीनों में फसल तैयार हो जाती है।

तगर के लिए उपयुक्त जलवायु कौन-सी है?

तगर (Valerian) की खेती के लिए उष्ण व उपोष्ण जलवायु उपयुक्त होती है। मध्यम तापमान, पर्याप्त धूप और हल्की ठंड इसे पसंद है। अत्यधिक पाला व जलभराव इसकी वृद्धि और जड़ों के विकास को नुकसान पहुँचाते हैं।

तगर के लिए कौन-सी मिट्टी सर्वोत्तम रहती है?

तगर (Valerian) की खेती बलुई दोमट या अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी में सफल रहती है। मिट्टी का पीएच 6.5 से 7.5 होना चाहिए। भारी और जलभराव वाली मिट्टी में फसल कमजोर हो जाती है।

तगर की बुवाई का सही समय क्या है?

तगर (Valerian) की बुवाई के लिए फरवरी-मार्च या जून-जुलाई का समय उपयुक्त माना जाता है। इन महीनों में तापमान और नमी संतुलित रहती है, जिससे पौधों की अच्छी बढ़वार और जड़ों का समुचित विकास होता है।

तगर की फसल में सिंचाई कैसे करनी चाहिए?

तगर (Valerian) की फसल में हल्की और नियमित सिंचाई आवश्यक होती है। अधिक पानी से जड़ सड़न का खतरा रहता है। गर्मियों में 10-12 दिन और सर्दियों में 20-25 दिन के अंतराल पर सिंचाई लाभकारी होती है।

तगर में खाद एवं उर्वरक क्यों आवश्यक हैं?

तगर (Valerian) में खाद एवं उर्वरक इसलिए आवश्यक होते हैं क्योंकि ये पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इससे जड़ों की अच्छी वृद्धि, पौधों की स्वस्थ बढ़वार और औषधीय गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे उपज और लाभ दोनों बढ़ते हैं।

तगर की खुदाई और उपज कब प्राप्त होती है?

तगर (Valerian) की फसल 12 से 15 महीनों में तैयार हो जाती है। पत्तियाँ पीली पड़ने पर जड़ों की खुदाई की जाती है। उचित देखभाल से अच्छी गुणवत्ता की जड़ें मिलती हैं, जिनका औषधीय उपयोग होता है।

क्या तगर को बगीचे में उगाया जा सकता है?

हाँ, तगर (Valerian) को बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। इसके लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी, पर्याप्त धूप और हल्की सिंचाई आवश्यक होती है। नियमित देखभाल और जैविक खाद देने से पौधा स्वस्थ रहता है और अच्छी जड़ उपज देता है।

तगर की खेती किस उद्देश्य से की जाती है?

तगर (Valerian) की खेती मुख्य रूप से औषधीय उपयोग के उद्देश्य से की जाती है। इसकी जड़ों का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाओं में अनिद्रा, तनाव, चिंता, मानसिक रोग और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं के उपचार में किया जाता है।

तगर के औषधीय लाभ क्या है?

तगर (Valerian) के औषधीय लाभ अनेक हैं। इसकी जड़ें अनिद्रा दूर करने, तनाव और चिंता कम करने में सहायक होती हैं। यह मानसिक शांति प्रदान करती है तथा तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाती है। आयुर्वेद में इसका उपयोग अवसाद और स्नायु विकारों के उपचार में किया जाता है।

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