
How to Grow Rosemary in Hindi: रोजमेरी को गुलमेंहदी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक खुशबूदार जड़ी-बूटी है, जिसने न सिर्फ अपने खाने और औषधीय गुणों के लिए, बल्कि एक फायदेमंद फसल के तौर पर भी ध्यान खींचा है। जैसे-जैसे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों में खुशबूदार जड़ी-बूटियों की मांग बढ़ रही है।
रोजमेरी की खेती उन किसानों के लिए एक शानदार मौका है, जो अपनी फसलों में विविधता लाना चाहते हैं और अपनी कमाई बढ़ाना चाहते हैं। यह लेख रोजमेरी (Rosemary) की खेती के जरूरी पहलुओं के बारे में बताता है, जिसमें खेती के लिए सबसे अच्छी स्थितियाँ, खेती के तरीके, कीट प्रबंधन और उपज की संभावनाएँ शामिल हैं।
रोजमेरी के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable climate for rosemary)
रोजमेरी मूल रूप से भूमध्यसागरीय क्षेत्र का पौधा है, इसलिए इसे धूप वाली और गर्म जलवायु पसंद है। यह 20°C से 30°C के तापमान में सबसे तेजी से बढ़ता है। हालांकि, यह कठोर पौधा है और शून्य से नीचे के तापमान को भी सहन कर सकता है, लेकिन अत्यधिक पाला, इसकी कोमल पत्तियों को नुकसान पहुँचा सकता है।
भारत के पहाड़ी क्षेत्रों और मैदानी इलाकों (सर्दियों के दौरान) में रोजमेरी (Rosemary) की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसे प्रतिदिन कम से कम 6-8 घंटे की सीधी धूप की आवश्यकता होती है।
रोजमेरी के लिए मिट्टी का चयन (Soil selection for rosemary)
रोजमेरी (Rosemary) के लिए मिट्टी का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। इसे अच्छी जल निकासी वाली रेतीली-दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। भारी चिकनी मिट्टी जहाँ पानी रुकता हो, वहां इसकी जड़ें सड़ने लगती हैं। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। गमले में लगाने के लिए 40% सामान्य मिट्टी, 40% रेत या बजरी और 20% वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद का मिश्रण आदर्श है।
रोजमेरी के लिए खेत की तैयारी (Field preparation for rosemary)
रोजमेरी (Rosemary) की खेती हेतु खेत की तैयारी के लिए 2-3 बार गहरी जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरा बना लें। जुताई के समय प्रति एकड़ 8-10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। यदि मिट्टी अम्लीय है, तो पीएच संतुलित करने के लिए चूने का उपयोग किया जा सकता है। उत्तम जल निकास के लिए ऊँची क्यारियाँ बनाएं, क्योंकि जड़ें जलभराव में खराब हो सकती हैं।
रोजमेरी की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Rosemary)
खेती के लिए रोजमेरी की कई किस्में उपलब्ध हैं, जिन्हें उनके तेल की मात्रा और विकास के आधार पर चुना जाता है। सलेम और ब्लू बॉय जैसी किस्में छोटे क्षेत्रों और गमलों के लिए अच्छी हैं। व्यावसायिक खेती के लिए टस्कन ब्लू और मिसाइल लोकप्रिय हैं, क्योंकि ये ऊँची बढ़ती हैं और इनमें तेल की मात्रा अधिक होती है।
कुछ रोजमेरी (Rosemary) की किस्में सीधी बढ़ती हैं, जबकि कुछ जमीन पर फैलती हैं। किसान को हमेशा अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार तेल-प्रधान किस्मों का चयन करना चाहिए।
रोजमेरी के लिए प्रसारण विधि (Propagation Method for Rosemary)
रोजमेरी का प्रसारण बीजों से करना काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इनके अंकुरण की दर बहुत कम (लगभग 10-20%) होती है। इसलिए, व्यावसायिक स्तर पर इसे कलम द्वारा उगाया जाता है। इसके लिए स्वस्थ पौधे की 10-15 सेमी लंबी अर्ध-काष्ठ टहनी ली जाती है।
रोजमेरी (Rosemary) की नीचे की पत्तियां हटाकर इसे रूटिंग हार्मोन में डुबोकर नर्सरी में लगाया जाता है। लगभग 4-6 सप्ताह में जड़ें आने के बाद इसे मुख्य खेत में रोपा जाता है। लेयरिंग भी एक प्रभावी तरीका है।
रोजमेरी पौध रोपण का समय और विधि (Rosemary Planting Time and Method)
रोजमेरी लगाने का सबसे अच्छा समय वसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) या मानसून के बाद (अक्टूबर-नवंबर) है। पौधों को तैयार क्यारियों में लगाना चाहिए। पौधों के बीच की दूरी 30-45 सेमी और कतारों के बीच की दूरी 60 सेमी रखनी चाहिए। रोपण के तुरंत बाद हल्की सिंचाई आवश्यक है।
यदि आप रोजमेरी (Rosemary) को वर्षा आधारित क्षेत्रों में लगा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि खेत में पानी जमा न हो। सही दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है, जिससे बीमारियां कम लगती हैं।
रोजमेरी के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Rosemary)
रोजमेरी (Rosemary) एक सूखा-सहनशील पौधा है। इसे बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। अत्यधिक सिंचाई इसकी सुगंधित तेल की गुणवत्ता को कम कर सकती है और जड़ों को नुकसान पहुँचा सकती है। सिंचाई तभी करें जब मिट्टी की ऊपरी 2 इंच की परत सूखी महसूस हो।
गर्मियों में सप्ताह में एक बार और सर्दियों में 15 दिनों में एक बार सिंचाई पर्याप्त है। ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) इसके लिए सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह सीधे जड़ों को नमी देती है और पानी की बर्बादी रोकती है।
रोजमेरी में खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizer in Rosemary)
हालांकि रोजमेरी कम पोषक तत्वों वाली मिट्टी में भी जीवित रह सकती है, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन के लिए संतुलित पोषण जरूरी है। खेत तैयार करते समय जैविक खाद का प्रयोग करें। रोपाई के बाद, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (NPK) का संतुलित अनुपात (लगभग 20:20:20 किग्रा प्रति एकड़) साल में दो बार दिया जा सकता है।
अत्यधिक नाइट्रोजन से बचें, क्योंकि इससे पौधा तेजी से बढ़ेगा लेकिन उसमें सुगंधित तेल की सांद्रता कम हो जाएगी। रोजमेरी (Rosemary) की हर कटाई के बाद हल्की खाद देना पौधों के दोबारा विकास के लिए अच्छा रहता है।
रोजमेरी की फसल में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Rosemarys)
शुरुआती विकास के दौरान रोजमेरी (Rosemary) के पौधे खरपतवारों के प्रति संवेदनशील होते हैं। खरपतवार पौधों के हिस्से का पोषण और पानी सोख लेते हैं। इसलिए, रोपाई के पहले 3-4 महीनों तक नियमित निराई-गुड़ाई अनिवार्य है।
निराई-गुड़ाई न केवल खरपतवार हटाती है बल्कि मिट्टी में हवा का संचार भी बढ़ाती है, जिससे जड़ें मजबूत होती हैं। मल्चिंग का उपयोग करना भी एक स्मार्ट तरीका है, जो खरपतवार को उगने से रोकता है और मिट्टी की नमी बनाए रखता है।
रोजमेरी में रोग और कीट नियंत्रण (Rosemarys Disease and Pest Control)
रोजमेरी (Rosemary) में कीटों का प्रकोप कम होता है, क्योंकि इसकी अपनी तेज गंध कीटों को दूर रखती है। हालांकि, कभी-कभी स्पाइडर माइट्स या एफिड्स का हमला हो सकता है। इन्हें नीम के तेल के स्प्रे से नियंत्रित किया जा सकता है।
सबसे बड़ी समस्या रूट रॉट और पाउडरी मिल्ड्यू है, जो अधिक पानी या नमी के कारण होती है। इससे बचने के लिए पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें ताकि हवा का संचार बना रहे और जल निकासी का उचित प्रबंध करें।
रोजमेरी फसल की कटाई और छंटाई (Rosemary Harvesting and Pruning)
रोजमेरी की पहली कटाई रोपाई के लगभग 8-12 महीने बाद की जाती है। जब पौधे की टहनियां लकड़ी जैसी होने लगें और फूल आने से ठीक पहले का समय हो, तब तेल की मात्रा सबसे अधिक होती है। टहनियों के ऊपरी 10-15 सेमी हिस्से को काटा जाता है।
साल में 2 से 3 बार कटाई की जा सकती है। नियमित छंटाई से पौधा झाड़ीदार और घना बनता है। ध्यान रखें कि एक बार में पौधे का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा न काटें, अन्यथा रोजमेरी (Rosemary) पौधे के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।
रोजमेरी को सुखाना और भंडारण (Drying and Storing Rosemary)
कटाई के बाद, रोजमेरी की टहनियों को छायादार और हवादार जगह पर सुखाया जाता है। इन्हें सीधे धूप में न सुखाएं, क्योंकि इससे तेल उड़ सकता है और पत्तियों का रंग खराब हो सकता है। सूखने के बाद पत्तियों को टहनियों से अलग कर लिया जाता है।
भंडारण के लिए एयरटाइट कंटेनर या जूट के बैग का उपयोग करें। इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें। यदि सही तरीके से भंडारित किया जाए, तो सूखी रोजमेरी (Rosemary) अपनी खुशबू और गुणों को एक वर्ष तक बरकरार रख सकती है।
रोजमेरी की खेती से पैदावार (Rosemarys Cultivation Yields)
रोजमेरी (Rosemary) की खेती कम लागत में उच्च मुनाफा देने वाली एक औषधीय और सुगंधित फसल है। प्रति एकड़ लगभग 10-12 टन ताजी पत्तियां (झाड़ी) प्राप्त हो सकती हैं, जो सूखने के बाद लगभग 2-3 टन (2000-3000 किलो) सूखी पत्तियों में बदल जाती हैं। लगभग 2000-2500 किलो सूखी पत्तियां या 40-60 किलो तेल प्राप्त किया जा सकता है। यह फसल 10-12 वर्षों तक उत्पादन देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)
रोजमेरी या गुलमेंहदी (Rosemary) एक बहुवर्षीय सुगंधित जड़ी-बूटी है, जिसकी खेती अच्छी जल निकासी वाली रेतीली-दोमट मिट्टी (पीएच 5-6.5) और भरपूर धूप (6-8 घंटे) में आसानी से की जा सकती है। इसे ठंडे मौसम में (सितंबर-अक्टूबर या फरवरी-मार्च) कटिंग या बीज से लगाया जाता है और यह कम पानी व कम खाद में भी विकसित हो सकती है।
रोजमेरी (Rosemary) मुख्य रूप से गर्म और शुष्क जलवायु का पौधा है। इसे खेती के लिए अच्छी धूप और जल निकासी वाली रेतीली या दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 8.5 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में इसकी जड़ें सड़ने का डर रहता है।
रोजमेरी (Rosemary) की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर या फरवरी-मार्च में की जाती है। इसे बीज, कटिंग या लेयरिंग द्वारा उगाया जा सकता है। व्यावसायिक रूप से कटिंग (कलम) का उपयोग सबसे सफल माना जाता है। पौधों के बीच की दूरी लगभग 45 से 60 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
रोजमेरी (Rosemary) की खेती के लिए टस्कन ब्लू, आर्प, ब्लू स्पायर्स और मिस जेसप्स अपराइट सबसे अच्छी और लोकप्रिय किस्में मानी जाती हैं। ये किस्में सीधे बढ़ती हैं, अच्छी खुशबू देती हैं और व्यवसायिक उत्पादन के लिए बेहतरीन हैं।
रोजमेरी (Rosemary) को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। रोपण के शुरुआती दिनों में नमी बनाए रखें, लेकिन बाद में केवल मिट्टी सूखने पर ही सिंचाई करें। खाद के रूप में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट का प्रयोग करें। अधिक रासायनिक उर्वरकों से इसके तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
रोजमेरी (Rosemary) की खेती के लिए 20 टन सड़ी हुई गोबर की खाद (FYM) प्रति एकड़ खेत तैयार करते समय डालें। रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद को प्राथमिकता दें। अच्छी वृद्धि के लिए एनपीके (10-10-10 या 12-12-17) का उपयोग मध्यम मात्रा में कटाई के बाद करें। 5.5-8 पीएच वाली रेतीली मिट्टी में सबसे अच्छी पैदावार होती है।
रोजमेरी (Rosemary) में मुख्य रूप से रूट रोट (जड़ सड़न) और पाउडरी मिल्ड्यू का खतरा रहता है, जो अत्यधिक नमी के कारण होता है। इससे बचने के लिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें और आवश्यकतानुसार जैविक कीटनाशकों या नीम के तेल का छिड़काव करें ताकि फसल सुरक्षित रहे।
रोजमेरी (Rosemary) की रोपण के लगभग 8 से 12 महीने बाद पहली कटाई की जा सकती है। जब फूल आने लगें, तब टहनियों को 10-15 सेंटीमीटर ऊपर से काट लें। एक एकड़ से सालाना लगभग 10 से 15 किलो उच्च गुणवत्ता वाला आवश्यक तेल (Essential Oil) प्राप्त किया जा सकता है।
हाँ, रोजमेरी (Rosemary) को बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। यह एक बारहमासी, सुगंधित और कम देखभाल वाला पौधा है जो धूप वाली जगह, सूखी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में सबसे अच्छा पनपता है। इसे जमीन में, ऊँची क्यारियों में या गमलों में भी उगाया जा सकता है।
रोजमेरी (Rosemary) की खेती मुख्य रूप से इसके सुगंधित तेल, औषधीय गुणों और रसोई में मसालों के रूप में उपयोग के लिए की जाती है। यह एक उच्च मूल्य वाली फसल है, जो इत्र, सौंदर्य प्रसाधन (कॉस्मेटिक्स), शैम्पू और दवाओं के निर्माण में बड़े पैमाने पर उपयोग होती है।
रोजमेरी (Rosemary) एक औषधीय जड़ी-बूटी है जो एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुणों से भरपूर है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देने, याददाश्त बढ़ाने, पाचन में सुधार करने और तनाव कम करने में बहुत सहायक है। यह आयरन, कैल्शियम और विटामिन (A, C, B-6) का एक अच्छा स्रोत है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।





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