• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
Krishak-Jagriti-Logo

Krishak Jagriti

Agriculture Info For Farmers

  • रबी फसलें
  • खरीफ फसलें
  • जायद फसलें
  • चारा फसलें
  • सब्जी फसलें
  • बागवानी
  • औषधीय फसलें
  • जैविक खेती
Home » Blog » Phyllanthus Niruri Farming: भुई आंवला की खेती कैसे करें

Phyllanthus Niruri Farming: भुई आंवला की खेती कैसे करें

January 6, 2026 by Bhupendra Dahiya Leave a Comment

Phyllanthus Niruri Farming: भुई आंवला की खेती कैसे करें

Bhui Amla Cultivation in Hindi: भुई आंवला (Phyllanthus Niruri), जिसे आमतौर पर चंका पिएड्रा या स्टोनब्रेकर के नाम से जाना जाता है, एक बहुत ही जानी-मानी औषधीय जड़ी-बूटी है, जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों, खासकर भारत में पाई जाती है। पारंपरिक चिकित्सा में अपने लंबे इतिहास के साथ, यह बहुमुखी पौधा अपने कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है, जिसमें किडनी की पथरी को ठीक करने और लिवर के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में इसकी प्रभावशीलता शामिल है।

जैसे-जैसे प्राकृतिक उपचारों की वैश्विक मांग बढ़ रही है, भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती भारतीय किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है, जो अपनी फसलों में विविधता लाना चाहते हैं और मुनाफा बढ़ाना चाहते हैं। यह लेख भुई आंवला की खेती के जरूरी पहलुओं पर प्रकाश डालता है, जिसमें कृषि पद्धतियाँ, खेती के लिए आदर्श स्थितियाँ, कीट प्रबंधन रणनीतियों के अवसर शामिल हैं, जो इस फायदेमंद क्षेत्र में आने के इच्छुक लोगों के लिए एक व्यापक गाइड प्रदान करता है।

Table of Contents

Toggle
  • भुई आंवला के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Phyllanthus niruri)
  • भुई आंवला के लिए मिट्टी और तैयारी (Soil and Preparation for Phyllanthus niruri)
  • भुई आंवला के लिए बीज और किस्में (Seeds and Varieties for Phyllanthus niruri)
  • भुई आंवला के लिए बुवाई की विधि (Sowing Method for Phyllanthus niruri)
  • भुई आंवला के लिए खाद और उर्वरक (Fertilizers and Manure for Bhui Amla)
  • भुई आंवला के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Phyllanthus niruri)
  • भुई आंवला की फसल में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Bhui Amla)
  • भुई आंवला में रोग और कीट (Diseases and Pests in Bhui Amla)
  • भुई आंवला की कटाई और उपज (Harvesting and Yield of Bhui Amla)
  • भुई आंवला को सुखाना और भंडारण (Drying and Storage of Bhumi Amla)
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

भुई आंवला के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Phyllanthus niruri)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती के लिए उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह पौधा गर्म और आर्द्र वातावरण में अच्छी वृद्धि करता है। 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श होता है। अत्यधिक ठंड और पाला इस फसल को नुकसान पहुँचा सकता है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में यह अच्छी तरह उगता है, परंतु जलभराव की स्थिति में फसल प्रभावित हो सकती है।

भुई आंवला के लिए मिट्टी और तैयारी (Soil and Preparation for Phyllanthus niruri)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) लगभग सभी प्रकार की मिट्टियों में उग सकता है, लेकिन अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। भूमि की तैयारी के लिए खेत की 2–3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लिया जाता है। अंतिम जुताई के समय 8–10 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना लाभकारी होता है।

भुई आंवला के लिए बीज और किस्में (Seeds and Varieties for Phyllanthus niruri)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती मुख्यत: बीज द्वारा की जाती है। एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लगभग 8–10 किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं। बीज हमेशा स्वस्थ, परिपक्व और विश्वसनीय स्रोत से लिए जाने चाहिए। कुछ उन्नत किस्में जैसे ‘CIM-PLN-1’ और ‘CIM-Jeevan’ अधिक उत्पादन और औषधीय गुणों के लिए जानी जाती हैं।

भुई आंवला के लिए बुवाई की विधि (Sowing Method for Phyllanthus niruri)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय जून से जुलाई माना जाता है, जब मानसून की शुरुआत होती है। सिंचित क्षेत्रों में इसकी बुवाई फरवरी–मार्च में भी की जा सकती है। बुवाई के लिए बीजों को हल्की मिट्टी या बालू में मिलाकर छिड़काव विधि से बोया जाता है या पंक्तियों में 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बोया जा सकता है। बीजों को बहुत गहराई में नहीं बोना चाहिए, अन्यथा अंकुरण प्रभावित होता है।

भुई आंवला के लिए खाद और उर्वरक (Fertilizers and Manure for Bhui Amla)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) एक कम पोषक तत्वों की आवश्यकता वाली फसल है, फिर भी अच्छे उत्पादन के लिए संतुलित पोषण आवश्यक है। गोबर की खाद के अतिरिक्त 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस और 20 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर देना लाभकारी होता है। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और शेष आधी 30–35 दिन बाद देनी चाहिए।

भुई आंवला के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Phyllanthus niruri)

यदि भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती वर्षा आधारित है तो सामान्यतः अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन लंबे समय तक वर्षा न होने की स्थिति में 2–3 सिंचाइयाँ आवश्यक हो सकती हैं। सिंचित क्षेत्रों में 10–12 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें। ध्यान रखें कि खेत में जलभराव न हो, क्योंकि इससे पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं।

भुई आंवला की फसल में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Bhui Amla)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) के शुरुआती 30-40 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में 2–3 बार निराई-गुड़ाई करना आवश्यक होता है। खरपतवार नियंत्रण से पौधों को पोषक तत्व, नमी और प्रकाश पर्याप्त मात्रा में मिलता है, जिससे उपज में वृद्धि होती है।

भुई आंवला में रोग और कीट (Diseases and Pests in Bhui Amla)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) में सामान्यतः रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है। कभी-कभी पत्ती धब्बा रोग या जड़ सड़न की समस्या देखी जा सकती है। उचित जल निकास, संतुलित खाद और स्वस्थ बीजों का उपयोग इन समस्याओं को काफी हद तक रोक सकता है। जैविक खेती अपनाने वाले किसान नीम आधारित उत्पादों का उपयोग कर सकते हैं।

भुई आंवला की कटाई और उपज (Harvesting and Yield of Bhui Amla)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की फसल 90 से 110 दिनों में कटाई योग्य हो जाती है। जब पौधे पूरी तरह विकसित हो जाएँ और फल बनने लगें, तब फसल की कटाई की जाती है। पूरे पौधे को जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है या जमीन की सतह से काट लिया जाता है। एक हेक्टेयर से औसतन 20–25 क्विंटल सूखी उपज प्राप्त की जा सकती है, जो खेती की विधि और देखभाल पर निर्भर करती है।

भुई आंवला को सुखाना और भंडारण (Drying and Storage of Bhumi Amla)

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की कटाई के बाद पौधों को छाया में सुखाया जाता है ताकि औषधीय गुण सुरक्षित रहें। पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें साफ करके बोरी या सूखे कंटेनर में संग्रहित किया जाता है। नमी से बचाव अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

भुई आंवला कैसे उगाएं?

भुई आंवला (Phyllanthus niruri) की खेती कम लागत, कम पानी और कम मेहनत में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है, जो बारिश के मौसम (जुलाई-अक्टूबर) में बोई जाती है, जैविक खाद और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में उगाई जाती है, और मुख्य रूप से लीवर, पेट व मूत्र संबंधी रोगों के उपचार में उपयोग होती है, जिसके लिए कटाई के बाद पत्तियों को सुखाकर बेचा जाता है।

भुई आंवला के लिए कैसी जलवायु अच्छी रहती है?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती भारत के लगभग सभी उष्ण एवं उपोष्ण क्षेत्रों में की जा सकती है। मध्यम वर्षा और गर्म जलवायु वाले क्षेत्र इसके लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।

भुई आंवला के लिए कौन-सी मिट्टी उपयुक्त होती है?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली भूमि उपयुक्त नहीं होती।

भुई आंवला की बुवाई का सही समय क्या है?

मानसून आधारित भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती के लिए जून–जुलाई सर्वोत्तम समय है। सिंचित क्षेत्रों में फरवरी–मार्च में भी इसकी बुवाई की जा सकती है।

भुई आंवला की खेती बीज से होती है या पौध से?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती सामान्यत: बीज द्वारा की जाती है। एक हेक्टेयर के लिए लगभग 8-10 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

भुई आंवला की उन्नत किस्में कौन-सी हैं?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की CIMAP द्वारा विकसित किस्में जैसे CIM-PLN-1 और CIM-Jeevan अधिक उपज और बेहतर औषधीय गुणों के लिए जानी जाती हैं।

भुई आंवला में कितनी खाद और उर्वरक देना चाहिए?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) को प्रति हेक्टेयर 8–10 टन सड़ी गोबर की खाद के साथ लगभग, नाइट्रोजन: 40 किग्रा, फास्फोरस: 20 किग्रा और पोटाश: 20 किग्रा देना लाभकारी होता है।

भुई आंवला में कितनी सिंचाई की जरूरत होती है?

वर्षा आधारित भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की खेती में सामान्यतः सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। सिंचित क्षेत्रों में 10–12 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है।

भुई आंवला में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें?

शुरुआती 30-40 दिनों में 2-3 बार भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) में निराई-गुड़ाई करना आवश्यक होता है। इससे पौधों की बढ़वार और उपज दोनों बेहतर होती हैं।

भुई आंवला में कौन-कौन से रोग और कीट लगते हैं?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) फसल में रोग और कीट बहुत कम लगते हैं। कभी-कभी पत्ती धब्बा रोग या जड़ सड़न की समस्या हो सकती है। उचित जल निकास और स्वस्थ बीज से इनसे बचाव किया जा सकता है।

भुई आंवला फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की फसल लगभग 90 से 110 दिनों में कटाई योग्य हो जाती है।

भुई आंवला की कटाई कैसे की जाती है?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) फसल तैयार होने पर पूरे पौधे को जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है या जमीन की सतह से काट लिया जाता है।

भुई आंवला की औसत उपज कितनी होती है?

एक हेक्टेयर से लगभग 20–25 क्विंटल भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की सूखी उपज प्राप्त की जा सकती है, जो खेती की देखभाल पर निर्भर करती है।

भुई आंवला को सुखाने की सही विधि क्या है?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की कटाई के बाद पौधों को छाया में सुखाया जाता है ताकि उनके औषधीय गुण सुरक्षित रहें। धूप में सुखाने से गुणवत्ता घट सकती है।

भुई आंवला का बाजार कहाँ मिलता है?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) की मांग आयुर्वेदिक दवा कंपनियों, हर्बल उद्योगों, औषधि निर्माताओं और थोक व्यापारियों में होती है।

क्या भुई आंवला को बगीचे में उगाया जा सकता है?

हाँ, भुई आंवला (Phyllanthus niruri) को बगीचे, गमलों या घर के छोटे-छोटे स्थानों पर आसानी से उगाया जा सकता है; यह एक औषधीय पौधा है जो कम देखभाल और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में पनपता है, और इसे खरपतवार समझकर फेंकने के बजाय सहेज कर रखना चाहिए क्योंकि यह कई स्वास्थ्य लाभ देता है।

भुई आंवला का उपयोग किस लिए किया जाता है?

भुई आंवला (Phyllanthus Niruri) एक औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और हर्बल दवाओं में किया जाता है। यह पीलिया, लीवर रोग, पथरी, मधुमेह, मूत्र विकार और पाचन संबंधी रोगों में लाभकारी माना जाता है।

Related Posts

Chamomile Farming in Hindi: जाने कैमोमाइल कैसे उगाएं
Chamomile Farming in Hindi: जाने कैमोमाइल कैसे उगाएं
Asparagus Farming in Hindi: शतावरी की खेती कैसे करें
Asparagus Farming in Hindi: शतावरी की खेती कैसे करें
Gymnema Farming in Hindi: मधुनाशिनी की खेती कैसे करें
Gymnema Farming in Hindi: मधुनाशिनी की खेती कैसे करें
Black Cardamom Farming: जाने बड़ी इलायची कैसे उगाएं
Black Cardamom Farming: जाने बड़ी इलायची कैसे उगाएं

Reader Interactions

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Primary Sidebar

  • Facebook
  • LinkedIn
  • Twitter

Recent Posts

  • Milk Thistle Farming in Hindi: दूध पत्र की खेती कैसे करें
  • Flame lily Farming in Hindi: कलिहारी की खेती कैसे करें
  • Rosemary Farming in Hindi: रोजमेरी की खेती कैसे करें
  • Black Cardamom Farming: जाने बड़ी इलायची कैसे उगाएं
  • Madder Farming in Hindi: जाने मजीठ की खेती कैसे करें

Footer

Copyright © 2026 Krishak Jagriti

  • Blog
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Sitemap
  • Contact Us