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Home » Blog » Geranium Farming in Hindi: जिरेनियम की खेती कैसे करें

Geranium Farming in Hindi: जिरेनियम की खेती कैसे करें

January 10, 2026 by Bhupendra Dahiya Leave a Comment

Geranium Farming in Hindi: जिरेनियम की खेती कैसे करें

How to Grow Geranium in Hindi: जेरेनियम की खेती ने अपनी सुंदरता और आर्थिक क्षमता के कारण काफी लोकप्रियता हासिल की है। अपने चमकीले रंगों और खुशबूदार पत्तियों के लिए जाने जाने वाले जेरेनियम न केवल सजावटी बागवानी में लोकप्रिय हैं, बल्कि जरूरी तेलों के उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनुकूल जलवायु और अलग-अलग तरह की मिट्टी के कारण, भारत के कई क्षेत्र इस बहुमुखी पौधे के प्रमुख उत्पादक के रूप में उभरे हैं।

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेरेनियम की मांग लगातार बढ़ने के साथ, खेती के सबसे अच्छे तरीकों, कीट प्रबंधन और बाजार के रुझानों को समझना किसानों और कृषि क्षेत्र के हितधारकों के लिए जरूरी हो जाता है। यह लेख जेरेनियम (Geranium) की खेती की बारीकियों पर गहराई से चर्चा करता है, जिसमें खेती के लिए आदर्श स्थितियों से लेकर इंडस्ट्री के भविष्य के रुझानों तक सब कुछ शामिल है।

Table of Contents

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  • जिरेनियम के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Geranium)
  • जिरेनियम के लिए भूमि का चयन (Soil Selection for Geranium)
  • जिरेनियम के लिए खेत की तैयारी (Field Preparation for Geranium)
  • जिरेनियम की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Geraniums)
  • जिरेनियम का प्रवर्धन और रोपाई (Geranium Propagation and Planting)
  • जिरेनियम के लिए खाद और उर्वरक (Fertilizers and Manure for Geranium)
  • जिरेनियम में सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management in Geranium)
  • जिरेनियम में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Geraniums)
  • जिरेनियम में रोग और कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control in Geranium)
  • जिरेनियम की कटाई और तेल निष्कर्षण (Geranium Harvesting and Oil Extraction)
  • जिरेनियम से उत्पादन और आर्थिक लाभ (Geranium Production and Benefits)
  • जिरेनियम पर निष्कर्ष (Conclusion on Geraniums)
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

जिरेनियम के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Geranium)

जिरेनियम (Geranium) की सफल खेती के लिए समशीतोष्ण से उपोष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह फसल अधिक ठंड या अत्यधिक गर्मी दोनों को सहन नहीं कर पाती। जिरेनियम के लिए आदर्श तापमान 15 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है।

अधिक ठंड पड़ने पर पौधों की वृद्धि रुक जाती है, जबकि बहुत अधिक गर्मी में तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हल्की धूप और मध्यम नमी वाली जलवायु में जिरेनियम के पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं, इसलिए पहाड़ी एवं पठारी क्षेत्र इसकी खेती के लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं।

जिरेनियम के लिए भूमि का चयन (Soil Selection for Geranium)

जिरेनियम (Geranium) की खेती के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। भूमि का पीएच मान 5.5 से 8.0 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली या भारी चिकनी मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों में सड़न की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

जिरेनियम के लिए खेत की तैयारी (Field Preparation for Geranium)

जिरेनियम के लिए (Geranium) खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले गहरी जुताई की जाती है, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद 2-3 बार हल्की जुताई कर खेत को समतल किया जाता है। अंतिम जुताई के समय अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की प्रारंभिक वृद्धि अच्छी होती है।

जिरेनियम की उन्नत किस्में (Improved Varieties of Geraniums)

जिरेनियम (Geranium) की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जो अधिक तेल उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। इनमें बोरबोन, केन्याई, अल्जीरियन तथा CIMAP द्वारा विकसित कुछ संकर किस्में प्रमुख हैं। बोरबोन किस्म को उच्च गुणवत्ता वाले तेल के लिए विशेष रूप से पसंद किया जाता है, जबकि केन्याई किस्म अधिक उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती है। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करना चाहिए।

जिरेनियम का प्रवर्धन और रोपाई (Geranium Propagation and Planting)

जिरेनियम (Geranium) की खेती बीजों से नहीं बल्कि वानस्पतिक प्रवर्धन द्वारा की जाती है। इसके लिए स्वस्थ और रोग-मुक्त पौधों से 10-15 सेंटीमीटर लंबी कलमें तैयार की जाती हैं। इन कलमों को नर्सरी में या सीधे खेत में लगाया जा सकता है। रोपाई के लिए कतार से कतार की दूरी लगभग 45-60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30–45 सेंटीमीटर रखी जाती है। रोपाई का सबसे उपयुक्त समय मानसून की शुरुआत या वसंत ऋतु माना जाता है, ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिल सके और वे जल्दी स्थापित हो सकें।

जिरेनियम के लिए खाद और उर्वरक (Fertilizers and Manure for Geranium)

जिरेनियम (Geranium) की अच्छी वृद्धि और अधिक तेल उत्पादन के लिए संतुलित पोषण आवश्यक है। खेत की तैयारी के समय 10-15 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की सड़ी खाद डालना लाभकारी होता है। इसके अलावा नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग किया जाता है।

सामान्यतः 100-120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर पर्याप्त माने जाते हैं। नाइट्रोजन की मात्रा को 2-3 भागों में बांटकर देने से पौधों की वृद्धि निरंतर बनी रहती है।

जिरेनियम में सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management in Geranium)

जिरेनियम (Geranium) को अत्यधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन नियमित सिंचाई से उत्पादन बेहतर होता है। रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई आवश्यक होती है। इसके बाद मौसम और मिट्टी की नमी के अनुसार 7–10 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जाती है। वर्षा ऋतु में जलभराव से बचाव अत्यंत आवश्यक है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने से पानी की बचत होती है और पौधों को आवश्यक नमी निरंतर मिलती रहती है।

जिरेनियम में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Geraniums)

खरपतवार जिरेनियम (Geranium) की खेती में पोषक तत्वों और नमी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। प्रारंभिक अवस्था में 2-3 बार निराई-गुड़ाई करना आवश्यक होता है। इसके अलावा मल्चिंग का उपयोग करने से खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ मिट्टी की नमी भी बनी रहती है। रासायनिक खरपतवारनाशकों का उपयोग सावधानीपूर्वक और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

जिरेनियम में रोग और कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control in Geranium)

जिरेनियम (Geranium) सामान्यतः कम रोगग्रस्त फसल मानी जाती है, फिर भी कुछ रोग और कीट इसका नुकसान कर सकते हैं। जड़ सड़न, पत्ती धब्बा और फफूंदजनित रोग प्रमुख हैं। कीटों में एफिड्स, थ्रिप्स और सफेद मक्खी का प्रकोप देखा जा सकता है। रोग-मुक्त पौध सामग्री का उपयोग, उचित जल निकास और फसल चक्र अपनाने से इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर जैविक या अनुशंसित रासायनिक नियंत्रण उपाय अपनाए जा सकते हैं।

जिरेनियम की कटाई और तेल निष्कर्षण (Geranium Harvesting and Oil Extraction)

जिरेनियम (Geranium) की पहली कटाई रोपाई के लगभग 4–5 महीने बाद की जाती है। इसके बाद हर 3–4 महीने के अंतराल पर कटाई संभव होती है। कटाई फूल आने से ठीक पहले करनी चाहिए, क्योंकि इसी समय पत्तियों में तेल की मात्रा और गुणवत्ता सर्वोत्तम होती है। कटाई के बाद ताजी पत्तियों को भाप आसवन विधि द्वारा तेल निकालने के लिए भेजा जाता है। सही समय पर कटाई और उचित आसवन तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाला तेल प्राप्त होता है।

जिरेनियम से उत्पादन और आर्थिक लाभ (Geranium Production and Benefits)

उचित देखभाल और प्रबंधन के साथ जिरेनियम (Geranium) से प्रति हेक्टेयर 80-120 किलोग्राम तक सुगंधित तेल प्राप्त किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिरेनियम तेल की मांग स्थिर बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है। प्रारंभिक लागत के बावजूद, एक बार फसल स्थापित हो जाने पर 3-4 वर्षों तक नियमित कटाई से निरंतर आय प्राप्त की जा सकती है।

जिरेनियम पर निष्कर्ष (Conclusion on Geraniums)

जिरेनियम (Geranium) की खेती सुगंधित फसलों में एक आकर्षक विकल्प है, जो कम क्षेत्र में अधिक लाभ देने की क्षमता रखती है। उचित जलवायु, सही किस्मों का चयन, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान इस फसल से अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। बदलते समय में औषधीय और सुगंधित पौधों की बढ़ती मांग को देखते हुए जिरेनियम की खेती भविष्य की एक सशक्त और लाभकारी कृषि प्रणाली के रूप में उभर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

जिरेनियम कैसे उगाएं?

जिरेनियम (Geranium) की खेती, खासकर उत्तर के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अच्छी है, क्योंकि यह सूखी और हल्की जलवायु पसंद करता है। इसकी खेती कलम (कटिंग) से होती है, जिसमें 12-15 सेमी की कलमों को 3-4 गांठों के साथ लगाया जाता है और 4-5 महीने बाद कटाई करके भाप आसवन द्वारा कीमती तेल निकाला जाता है, जो इत्र और कॉस्मेटिक्स में उपयोग होता है। इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी और 5.5-7.5 पीएच मान उपयुक्त होता है।

जिरेनियम की खेती किन क्षेत्रों में सफल है?

जिरेनियम (Geranium) की खेती कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में सफलतापूर्वक की जाती है। पहाड़ी और मध्यम जलवायु वाले क्षेत्र इसके लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं।

जिरेनियम के लिए कैसी जलवायु अच्छी रहती है?

जिरेनियम (Geranium) के लिए समशीतोष्ण से उपोष्णकटिबंधीय जलवायु सर्वोत्तम होती है। 15-30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श है। अत्यधिक ठंड, पाला और बहुत अधिक गर्मी इसके उत्पादन और तेल की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

जिरेनियम की खेती के लिए कैसी मिट्टी चाहिए?

अच्छे जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी जिरेनियम (Geranium) के लिए सर्वोत्तम होती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 8.0 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली भूमि में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए।

जिरेनियम की खेती बीज से होती है या कलम से?

जिरेनियम (Geranium) की खेती बीज से नहीं होती। इसका प्रवर्धन वानस्पतिक विधि से, यानी स्वस्थ पौधों की कलम (कटिंग) से किया जाता है। यही विधि व्यावसायिक खेती में अपनाई जाती है।

जिरेनियम की रोपाई का सही समय क्या है?

जिरेनियम (Geranium) की रोपाई के लिए मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) या वसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, ताकि पौधों को पर्याप्त नमी और अनुकूल तापमान मिल सके।

जिरेनियम की प्रमुख उन्नत किस्में कौन-सी हैं?

जिरेनियम (Geranium) की प्रचलित प्रमुख किस्में हैं: बोरबोन, केन्याई और अल्जीरियन आदि। CIMAP द्वारा विकसित उन्नत बोरबोन किस्म उच्च गुणवत्ता वाले तेल के लिए जानी जाती है।

जिरेनियम में कितनी सिंचाई की जरूरत होती है?

जिरेनियम (Geranium) को मध्यम सिंचाई की आवश्यकता होती है। सामान्यतः 7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई पर्याप्त रहती है। वर्षा ऋतु में जलभराव से बचाव बहुत जरूरी है। ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

जिरेनियम में कौन-कौन से रोग और कीट लगते हैं?

जिरेनियम (Geranium) के मुख्य रोगों में जड़ सड़न, पत्ती धब्बा और फफूंदजनित रोग शामिल है। मुख्य कीट में एफिड्स, थ्रिप्स और सफेद मक्खी शामिल है। समुचित जल निकास, स्वस्थ पौध सामग्री और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाकर इनसे बचाव किया जा सकता है।

जिरेनियम की पहली कटाई कब की जाती है?

जिरेनियम (Geranium) की पहली कटाई रोपाई के लगभग 4–5 महीने बाद की जाती है। इसके बाद हर 3–4 महीने के अंतराल पर कटाई संभव होती है।

जिरेनियम की कटाई किस अवस्था में करनी चाहिए?

जिरेनियम (Geranium) की कटाई फूल आने से ठीक पहले करनी चाहिए। इस अवस्था में पत्तियों में तेल की मात्रा और गुणवत्ता सबसे अधिक होती है।

जिरेनियम से तेल कैसे निकाला जाता है?

जिरेनियम (Geranium) की ताजी पत्तियों और तनों से भाप आसवन विधि द्वारा तेल निकाला जाता है। कटाई के तुरंत बाद आसवन करने से तेल की गुणवत्ता बेहतर रहती है।

प्रति हेक्टेयर जिरेनियम से कितना तेल प्राप्त होता है?

उचित प्रबंधन की स्थिति में जिरेनियम (Geranium) से प्रति हेक्टेयर 80 से 120 किलोग्राम तक सुगंधित तेल प्राप्त किया जा सकता है।

जिरेनियम की फसल कितने वर्षों तक चलती है?

एक बार पौधे स्थापित हो जाने के बाद जिरेनियम (Geranium) की फसल 3 से 4 वर्षों तक लगातार कटाई और उत्पादन देती है।

क्या जिरेनियम को बगीचे में उगाया जा सकता है?

हाँ, जिरेनियम (Geranium) को बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है, क्योंकि ये बहुत लचीले और मजबूत पौधे होते हैं, जो धूप और आंशिक छाया दोनों में पनपते हैं, और इन्हें उगाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती, जिससे ये नए बागवानों के लिए भी अच्छे रहते हैं। इन्हें बगीचे की क्यारियों, गमलों या जमीन को ढकने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, बस ध्यान रहे कि मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली हो और इन्हें पर्याप्त धूप मिले।

जिरेनियम के प्रमुख उपयोग क्या है?

जिरेनियम (Geranium) का मुख्य उपयोग इसके तेल के लिए होता है, जो इत्र, साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों में खुशबू और स्वाद के लिए इस्तेमाल होता है, साथ ही इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन-रोधी) और एंटीसेप्टिक (जीवाणुरोधी) गुण होते हैं, इसलिए यह त्वचा की देखभाल में, घावों को भरने और एक्जिमा जैसी समस्याओं में भी उपयोगी है, और इसे अरोमाथेरेपी में तनाव कम करने और भावनात्मक संतुलन के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

जिरेनियम के औषधीय स्वास्थ्य लाभ क्या है?

जिरेनियम (Geranium) के औषधीय लाभों में त्वचा का संतुलन, मुंहासे कम करना, सूजन कम करना, एंटीसेप्टिक गुण, तनाव और चिंता से राहत, हार्मोनल संतुलन (रजोनिवृत्ति में सहायक), और श्वसन संबंधी समस्याओं में मदद करना शामिल हैं, जो इसके एंटीऑक्सीडेंट, सूजन-रोधी और जीवाणुरोधी गुणों के कारण हैं, लेकिन उपयोग से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूरी है।

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