
How to Grow Country Mallow in Hindi: बला, जो अपने चमकीले हरे पत्तों और पोषण संबंधी फायदों के लिए जाना जाता है, सदियों से कृषि और खान-पान का एक अहम हिस्सा रहा है। बला को आयुर्वेद में बलवर्धक, वातनाशक और पुनरुत्थानकारी औषधि के रूप में जाना जाता है। वर्तमान समय में प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग के कारण बला की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।
यह बहुमुखी पौधा न केवल देश भर में अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में पनपता है, बल्कि टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ और ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण इसकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ, बला (Country Mallow) की खेती किसानों के लिए अवसर और चुनौतियाँ दोनों पेश करती है। यह लेख भारत में कंट्री मैलो की खेती की बारीकियों पर गहराई से चर्चा करता है।
बला के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Country Mallow)
बला की खेती के लिए उष्ण और समशीतोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह पौधा गर्म और आर्द्र वातावरण में अच्छी तरह पनपता है। लगभग 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके विकास के लिए अनुकूल होता है। मध्यम से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए उपयुक्त होते हैं, हालांकि बहुत अधिक ठंड और पाले वाले क्षेत्रों में इसकी वृद्धि प्रभावित हो सकती है। पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिलने पर बला (Country Mallow) के पौधे स्वस्थ और मजबूत होते हैं।
बला के लिए मिट्टी का चयन (Soil Selection for Country Mallow)
मिट्टी की बात करें तो बला (Country Mallow) की खेती के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी में जैविक पदार्थों की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए ताकि पौधों की जड़ों का विकास अच्छे से हो सके। मिट्टी का पीएच मान लगभग 6.0 से 7.5 के बीच होना आदर्श माना जाता है। जलभराव वाली भूमि में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
बला के लिए खेत की तैयारी (Land Preparation for Country Mallow)
बला (Country Mallow) की खेती से पहले भूमि की अच्छी तैयारी करना आवश्यक होता है। इसके लिए खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई की जाती है, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए और खरपतवार नष्ट हो जाएँ। अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर आठ से दस टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना अत्यंत लाभकारी होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को प्राकृतिक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। जैविक खाद के प्रयोग से औषधीय गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।
बला के लिए बीज और नर्सरी (Country Mallow Seeds and Nursery)
बला की खेती मुख्य रूप से बीज द्वारा की जाती है। इसके बीज छोटे और कठोर होते हैं, इसलिए बुवाई से पहले उन्हें लगभग दस से बारह घंटे पानी में भिगो देना चाहिए, जिससे अंकुरण अच्छा हो सके। सामान्यतः किसान पहले नर्सरी में पौधे तैयार करते हैं और बाद में उन्हें मुख्य खेत में रोपित करते हैं।
लगभग पच्चीस से तीस दिनों में बला (Country Mallow) के पौधे रोपाई के योग्य हो जाते हैं। खरीफ मौसम में जून से जुलाई का समय बला की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो तो इसे फरवरी-मार्च में भी उगाया जा सकता है।
बला की रोपाई और अन्तराल (Country Mallow Planting and Spacing)
रोपाई के समय बला (Country Mallow) के पौधों के बीच उचित दूरी रखना आवश्यक होता है। सामान्यतः पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखी जाती है। इससे पौधों को पर्याप्त स्थान, पोषक तत्व और सूर्य प्रकाश मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि अच्छी होती है। प्रारंभिक अवस्था में पौधों को पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है, इसलिए रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करनी चाहिए।
बला के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Sida cordifolia)
बला (Country Mallow) को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक सूखा रहने पर सिंचाई आवश्यक हो जाती है। सामान्यतः 15 से 20 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करना पर्याप्त होता है। वर्षा ऋतु में प्रायः सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती। ध्यान रखना चाहिए कि खेत में जलभराव न हो, क्योंकि इससे फसल को नुकसान हो सकता है।
बला के लिए खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizer for Country Mallow)
उर्वरकों की दृष्टि से बला (Country Mallow) की खेती में जैविक खाद को प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ यदि आवश्यकता हो तो सीमित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग भी किया जा सकता है। संतुलित पोषण से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और जड़ों का विकास मजबूत होता है।
प्रारंभिक 40 से 45 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण अत्यंत आवश्यक होता है। इसके लिए दो से तीन बार निराई-गुड़ाई की जाती है, जिससे खरपतवार हट जाते हैं और पौधों को पोषक तत्वों की पूरी मात्रा मिलती है।
बला में कीट और रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control in Sida cordifolia)
बला (Country Mallow) की फसल में कीट और रोगों का प्रकोप सामान्यतः कम देखा जाता है। फिर भी कभी-कभी पत्ती खाने वाले कीट या जड़ सड़न जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इनसे बचाव के लिए जैविक तरीकों जैसे नीम तेल के छिड़काव या अन्य जैविक कीटनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है। रासायनिक दवाओं के कम उपयोग से औषधीय गुणवत्ता बनी रहती है।
बला की कटाई और उपज (Harvesting and Yield of Country Mallow)
बला की फसल लगभग पाँच से छह महीनों में तैयार हो जाती है। जब पौधे पूरी तरह विकसित हो जाते हैं, तब औषधीय उपयोग के लिए उनकी जड़ों की खुदाई की जाती है। जड़ों को सावधानीपूर्वक निकालकर साफ पानी से धोया जाता है और फिर छाया में सुखाया जाता है।
अच्छी तरह सूखने के बाद इन्हें भंडारण के लिए तैयार किया जाता है। सामान्यतः प्रति हेक्टेयर 10 से 15 क्विंटल बला (Country Mallow) की सूखी जड़ों की उपज प्राप्त हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)
यह मालवेसी कुल का पौधा है। संस्कृत में इसे बला (Country Mallow), नागबला या वाट्यानी कहा जाता है। हिंदी में इसे बला या खरेटी के नाम से जाना जाता है। यह एक बहुवर्षीय, झाड़ीदार पौधा होता है, जिसकी ऊँचाई सामान्यतः 1 से 1.5 मीटर तक होती है।
बला (Country Mallow) की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी और थोड़े अम्लीय से तटस्थ पीएच की आवश्यकता होती है, जिसे बीज या कटिंग से उगाया जा सकता है और यह ताकत, ऊर्जा और कई बीमारियों के इलाज के लिए आयुर्वेद में इस्तेमाल होती है।
बला (Country Mallow) की खेती उष्ण एवं समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में की जा सकती है। यह भारत के अधिकांश भागों में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है।
अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी बला (Country Mallow) की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
बला (Country Mallow) की बुवाई का सर्वोत्तम समय खरीफ मौसम में जून से जुलाई माना जाता है। सिंचाई की सुविधा होने पर फरवरी–मार्च में भी इसकी खेती की जा सकती है।
बला (Country Mallow) की खेती मुख्य रूप से बीज द्वारा की जाती है। पहले नर्सरी में पौधे तैयार करके फिर खेत में रोपाई करना अधिक लाभकारी होता है।
बला (Country Mallow) की खेती के लिए लगभग 3 से 4 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।
बला (Country Mallow) को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। सामान्यतः 15-20 दिन के अंतराल पर सिंचाई पर्याप्त होती है। जलभराव से बचाव आवश्यक है।
बला (Country Mallow) की खेती में गोबर की खाद या अन्य जैविक खाद सर्वोत्तम होती है। आवश्यकता अनुसार सीमित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश भी दिया जा सकता है।
बला (Country Mallow) की खेती में प्रारंभिक 40–45 दिनों तक 2–3 बार निराई-गुड़ाई करके खरपतवार नियंत्रित किए जाते हैं।
बला (Country Mallow) में सामान्यतः पत्ती खाने वाले कीट और जड़ सड़न रोग देखने को मिलते हैं। नीम तेल या जैविक कीटनाशकों से इनका नियंत्रण किया जा सकता है।
बला (Country Mallow) की फसल लगभग 5–6 महीनों में तैयार हो जाती है।
एक हेक्टेयर से लगभग 10–15 क्विंटल बला (Country Mallow) की सूखी जड़ों की उपज प्राप्त होती है।
हाँ, बला (Country Mallow) औषधि को गमले या बगीचे, दोनों जगह आसानी से उगाया जा सकता है, क्योंकि यह एक मजबूत और आसानी से बढ़ने वाला औषधीय पौधा है जो घर के बगीचे या बालकनी के लिए उपयुक्त है, बस इसे अच्छी जल निकासी और पर्याप्त धूप की जरूरत होती है।
बला एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने, मांसपेशियों व नसों को मजबूत करने, जोड़ों के दर्द (गठिया, साइटिका) और सूजन को कम करने, थकान दूर करने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, श्वसन संबंधी समस्याओं (अस्थमा, खांसी) में राहत देने और महिलाओं के स्वास्थ्य (प्रसव के बाद, बांझपन) में मदद करने जैसे कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है, साथ ही यह तनाव कम करके नींद में सुधार करती है और एक अच्छा टॉनिक है।





Leave a Reply