
How to Grow Chamomile in Hindi: कैमोमाइल, एक पसंदीदा जड़ी-बूटी जो अपने सुकून देने वाले गुणों के लिए जानी जाती है, अपने महत्वपूर्ण औषधीय फायदों और खेती की संभावनाओं के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पारंपरिक रूप से विभिन्न उपचार पद्धतियों, खासकर आयुर्वेद में, कैमोमाइल को तनाव कम करने, आराम देने और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की क्षमता के लिए सराहा जाता है।
जैसे-जैसे हर्बल दवाओं की मांग बढ़ रही है, किसान इस बहुमुखी पौधे की खेती पर विचार कर रहे हैं, जो देश भर में अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में अच्छी तरह उगता है। यह लेख कैमोमाइल (Chamomile) की खेती के तरीकों, ऐतिहासिक महत्व, आर्थिक संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर गहराई से चर्चा करता है, और पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक बाजारों दोनों में इसके महत्व पर प्रकाश डालता है।
कैमोमाइल के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable Climate for Chamomile)
कैमोमाइल (Chamomile) की खेती के लिए समशीतोष्ण से लेकर उपोष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। इसे ठंडी और हल्की गर्म जलवायु पसंद होती है। अत्यधिक गर्मी या पाला इसके लिए हानिकारक हो सकता है। 15 से 25 डिग्री (60-68°F) सेल्सियस तापमान इसके विकास के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसे पूरी धूप पसंद होती है, लेकिन गर्म क्षेत्रों में दोपहर की हल्की छाया से फायदा होता है।
कैमोमाइल के लिए भूमि का चयन (Soil Selection for Chamomile)
मिट्टी की बात करें तो कैमोमाइल (Chamomile) हल्की, दोमट तथा अच्छे जल निकास वाली मिट्टी में अच्छी तरह बढ़ती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7.5 के बीच उपयुक्त रहता है। जलभराव वाली भारी मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने का खतरा रहता है।
यह खराब और बंजर मिट्टी में भी उग सकती है, लेकिन उपजाऊ मिट्टी में फूल बेहतर आते हैं। इसे धूप वाली जगह पसंद है और यह सूखे और कम उर्वरता को सहन कर सकती है, लेकिन जलभराव से बचना चाहिए।
कैमोमाइल के लिए भूमि की तैयारी (Land Preparation for Chamomile)
कैमोमाइल (Chamomile) की सफल खेती के लिए भूमि की उचित तैयारी अत्यंत आवश्यक है। सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि पुरानी फसल के अवशेष नष्ट हो जाएँ और मिट्टी भुरभुरी बन सके। इसके बाद 2-3 बार हल्की जुताई करके पाटा लगाना चाहिए।
अंतिम जुताई के समय खेत में 10-15 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिला देना लाभकारी होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
कैमोमाइल के किस्मों का चयन (Selection of Chamomile Varieties)
कैमोमाइल की खेती मुख्यत: बीजों द्वारा की जाती है। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करना चाहिए। भारत में जर्मन कैमोमाइल की उन्नत किस्में जैसे सीएम- 1, ‘सीएम- 2 और कुछ स्थानीय चयनित किस्में उपलब्ध हैं, जो अधिक फूल उत्पादन और उच्च तेल मात्रा देती हैं।
कैमोमाइल (Chamomile) के बीज बहुत छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें सीधे खेत में बोने की बजाय नर्सरी में पौध तैयार करके रोपाई करना अधिक सफल रहता है।
कैमोमाइल के लिए बुवाई की विधि (Chamomile Sowing Method)
कैमोमाइल (Chamomile) की नर्सरी अक्टूबर-नवंबर में तैयार की जाती है। इसके लिए अच्छी तरह तैयार क्यारी में बीजों को हल्के हाथ से छिड़ककर बोया जाता है और ऊपर से हल्की मिट्टी या बालू की पतली परत डाल दी जाती है। बीजों को अधिक गहराई में नहीं दबाना चाहिए। 7-10 दिनों में अंकुरण हो जाता है।
जब पौधे 4-6 सप्ताह के हो जाएँ और उनमें 4-5 पत्तियाँ आ जाएँ, तब इन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है। पौधों की रोपाई 30×30 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए ताकि उन्हें पर्याप्त स्थान और पोषण मिल सके।
कैमोमाइल के लिए खाद और उर्वरक (Fertilizers and Manure for Chamomile)
कैमोमाइल (Chamomile) एक औषधीय फसल होने के कारण इसमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए। जैविक खेती को प्राथमिकता देना अधिक लाभकारी होता है। सामान्यत: गोबर की खाद के साथ 40-50 किलोग्राम नाइट्रोजन, 30 किलोग्राम फॉस्फोरस और 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देना उपयुक्त रहता है। नाइट्रोजन को दो भागों में बाँटकर देना चाहिए, आधा रोपाई के समय और शेष आधा फूल आने से पहले।
कैमोमाइल के लिए सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management for Chamomile)
कैमोमाइल (Chamomile) को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन नियमित नमी बनाए रखना आवश्यक है। पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करनी चाहिए। इसके बाद 10-15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए। फूल आने की अवस्था में विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि इस समय नमी की कमी से फूलों की गुणवत्ता और मात्रा प्रभावित हो सकती है। जलभराव से बचाव अत्यंत आवश्यक है।
कैमोमाइल की फसल में खरपतवार नियंत्रण (Weed Control in Chamomile)
प्रारंभिक अवस्था में कैमोमाइल (Chamomile) के पौधे धीरे बढ़ते हैं, इसलिए खरपतवारों का प्रभाव अधिक होता है। समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है। पहली निराई रोपाई के 20-25 दिन बाद और दूसरी 40-45 दिन बाद करनी चाहिए। जैविक खेती में हाथ से निराई सर्वोत्तम रहती है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर हल्के शाकनाशी का सीमित उपयोग किया जा सकता है।
कैमोमाइल में कीट और रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control in Chamomile)
कैमोमाइल (Chamomile) में सामान्यत: कीट एवं रोगों का प्रकोप कम होता है, फिर भी कभी-कभी एफिड्स, थ्रिप्स और पत्ती खाने वाले कीट दिखाई दे सकते हैं। जैविक नियंत्रण के लिए नीम का तेल या नीम आधारित कीटनाशकों का छिड़काव प्रभावी होता है। रोगों में जड़ सड़न और पत्ती धब्बा प्रमुख हैं, जो अधिक नमी के कारण होते हैं। उचित जल निकास और फसल चक्र अपनाकर इनसे बचाव किया जा सकता है।
कैमोमाइल के फूलों की तुड़ाई (Harvesting Chamomiles Flowers)
कैमोमाइल (Chamomile) की खेती में फूल ही मुख्य आर्थिक उत्पाद होते हैं। फूलों की तुड़ाई तब करनी चाहिए जब पंखुड़ियाँ पूरी तरह खुल जाएँ और केंद्र पीला हो। यह अवस्था औषधीय तत्वों की दृष्टि से सर्वोत्तम होती है। तुड़ाई हाथ से की जाती है और इसे सुबह के समय करना बेहतर रहता है। एक ही फसल से 3-4 बार फूलों की तुड़ाई की जा सकती है।
कैमोमाइल को सुखाना और भंडारण (Drying and Storing Chamomiles)
तुड़ाई के बाद फूलों को छायादार, हवादार स्थान पर पतली परत में फैलाकर सुखाया जाता है। तेज धूप में सुखाने से औषधीय गुण नष्ट हो सकते हैं। पूरी तरह सूख जाने पर फूलों को नमी रहित, साफ और बंद कंटेनरों में संग्रहित किया जाता है। उचित भंडारण से कैमोमाइल (Chamomile) के फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है।
कैमोमाइल का उत्पादन और उपज (Chamomile Production and Yield)
अच्छी कृषि तकनीकों को अपनाने पर कैमोमाइल (Chamomile) से प्रति हेक्टेयर 800-1200 किलोग्राम सूखे फूल प्राप्त किए जा सकते हैं। फूलों से आवश्यक तेल (Essential Oil) भी निकाला जाता है, जिसकी बाजार में बहुत अधिक मांग होती है। तेल की मात्रा और गुणवत्ता किस्म, जलवायु और खेती की विधि पर निर्भर करती है।
कैमोमाइल का आर्थिक महत्व (Economic Importance of Chamomiles)
कैमोमाइल (Chamomile) की खेती आर्थिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है। इसके सूखे फूल, चाय, तेल और औषधीय उत्पादों की देश-विदेश में अच्छी मांग है। आयुर्वेदिक दवा निर्माता, हर्बल कंपनियाँ और निर्यातक इसे अच्छे दामों पर खरीदते हैं। सही विपणन व्यवस्था अपनाकर किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
कैमोमाइल की खेती पर निष्कर्ष (Conclusion on Chamomile Cultivations)
कैमोमाइल एक बहुउपयोगी, औषधीय और लाभकारी फसल है, जिसकी खेती कम लागत में की जा सकती है और अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उचित जलवायु, सही कृषि तकनीक और जैविक तरीकों को अपनाकर किसान इसकी खेती से न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
बल्कि औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रचार में भी योगदान दे सकते हैं। बदलते समय में कैमोमाइल (Chamomile) की खेती किसानों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)
कैमोमाइल (Chamomile) की बुवाई का सबसे उचित समय नवंबर का शुरुआती सप्ताह माना गया है। एक एकड़ भूमि के लिए लगभग 400 ग्राम बीज की जरूरत होती है। पांच महीने की अवधि में पौधे फूलों से भर जाते हैं और फरवरी-मार्च में फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह फसल कम पानी में भी आसानी से पनप जाती है।
कैमोमाइल (Chamomile) की खेती के लिए ठंडी एवं समशीतोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसे हल्की ठंड और मध्यम तापमान पसंद होता है। 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके विकास के लिए आदर्श रहता है। अत्यधिक गर्मी और पाले की स्थिति में पौधों की वृद्धि तथा फूलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
कैमोमाइल (Chamomile) हल्की, भुरभुरी और अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी में अच्छी तरह उगती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली भारी मिट्टी इस फसल के लिए हानिकारक होती है, क्योंकि अधिक नमी से जड़ों के सड़ने और रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है।
कैमोमाइल (Chamomile) की दो प्रमुख प्रजातियाँ जर्मन कैमोमाइल और रोमन कैमोमाइल हैं। औषधीय खेती के लिए जर्मन कैमोमाइल अधिक उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इसमें औषधीय तेल की मात्रा अधिक होती है। यह एक वर्षीय पौधा है, जल्दी तैयार होता है और व्यावसायिक खेती के लिए अधिक उत्पादन एवं बेहतर गुणवत्ता प्रदान करता है।
कैमोमाइल (Chamomile) की खेती के लिए नर्सरी में बीज बोने का उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर तक होता है। इसके बाद लगभग 4-6 सप्ताह में पौधे रोपाई के योग्य हो जाते हैं। मुख्य खेत में रोपाई नवंबर से दिसंबर के बीच की जाती है, जिससे पौधों को अनुकूल तापमान मिल सके और अच्छी फूल उपज प्राप्त हो।
एक हेक्टेयर क्षेत्र में कैमोमाइल (Chamomile) की खेती के लिए लगभग 250 से 300 ग्राम बीज पर्याप्त होते हैं। बीज बहुत छोटे होते हैं, इसलिए उन्हें सावधानीपूर्वक नर्सरी में बोया जाता है। उच्च गुणवत्ता और प्रमाणित बीजों का उपयोग करने से पौधों की संख्या, वृद्धि और फूलों की उपज में सुधार होता है।
कैमोमाइल (Chamomile) के पौधों की रोपाई सामान्यत: 30 × 30 सेंटीमीटर की दूरी पर की जाती है। उचित दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त प्रकाश, वायु और पोषक तत्व मिलते हैं। इससे पौधों का विकास अच्छा होता है, रोगों की संभावना कम रहती है और फूलों की संख्या तथा गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
कैमोमाइल (Chamomile) को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना आवश्यक है। पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करनी चाहिए। इसके बाद 10-15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती है। फूल आने की अवस्था में नमी की कमी से बचना चाहिए तथा जलभराव से विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए।
अच्छी उपज के लिए कैमोमाइल (Chamomile) में संतुलित पोषण आवश्यक होता है। खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद मिलाना लाभकारी होता है। इसके साथ सीमित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश देने से पौधों की वृद्धि और फूल उत्पादन बढ़ता है। औषधीय फसल होने के कारण जैविक खाद का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है।
कैमोमाइल (Chamomile) की फसल को मुख्य रूप से एफिड्स और थ्रिप्स जैसे कीट प्रभावित करते हैं, जो पत्तियों का रस चूसकर नुकसान पहुँचाते हैं, और पाउडरी फफूंद तथा भूरे पत्तों के धब्बे जैसे रोग, जो ज्यादातर खराब हवा के संचार और ज्यादा पानी देने से होते हैं। इसके अतिरिक्त, भंडारण के दौरान एस्परगिलस और पेनिसिलियम जैसे फफूंद भी सूखे फूलों को नुकसान पहुँचाते हैं।
कैमोमाइल (Chamomile) के फूलों की तुड़ाई उस समय करनी चाहिए जब फूल पूरी तरह खिल जाएँ और उनका केंद्र पीले रंग का हो। इस अवस्था में फूलों में औषधीय तत्व सर्वाधिक होते हैं। तुड़ाई प्राय: हाथ से की जाती है और इसे सुबह के समय करना बेहतर होता है। एक फसल से 3-4 बार तुड़ाई की जा सकती है।
कैमोमाइल (Chamomile) की खेती से प्रति हेक्टेयर लगभग 800-1200 किलोग्राम सूखे फूल प्राप्त किए जा सकते हैं। एक फसल से सामान्यत: 3-4 बार फूलों की तुड़ाई की जा सकती है।
हाँ, कैमोमाइल (Chamomile) को बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। इसे भरपूर धूप और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी (हल्की या रेतीली) पसंद है, और यह गमलों या सीधे जमीन में, क्यारियों या लॉन के रूप में भी अच्छा उगता है, बशर्ते पाले का खतरा टल गया हो और मिट्टी में पर्याप्त नमी हो।
कैमोमाइल (Chamomile) का प्रमुख उपयोग अच्छी नींद लाने, चिंता और तनाव कम करने, पाचन सुधारने (पेट दर्द, ऐंठन, सूजन), सर्दी-जुकाम के लक्षणों से राहत देने और त्वचा की जलन व घावों को ठीक करने में होता है, इसके सूजन-रोधी और आरामदायक गुणों के कारण इसे चाय, तेल या अर्क के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
कैमोमाइल (Chamomile) के औषधीय लाभों में नींद में सुधार, तनाव और चिंता कम करना, पाचन में सहायता करना (ऐंठन और सूजन से राहत), त्वचा की समस्याओं (जैसे एक्जिमा, रैश) को शांत करना, सर्दी-जुकाम के लक्षणों से राहत और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना शामिल है, क्योंकि इसमें सूजन-रोधी और रोगाणुरोधी गुण होते हैं।





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