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Black Turmeric Farming in Hindi: काली हल्दी कैसे उगाएं

January 18, 2026 by Bhupendra Dahiya Leave a Comment

Black Turmeric Farming in Hindi: काली हल्दी कैसे उगाएं

How to Grow Black Turmeric in Hindi: काली हल्दी, जिसका वैज्ञानिक नाम करकुमा केसिया है, भारत में पाई जाने वाली एक तेजी से लोकप्रिय हो रही मसाला और औषधीय जड़ी बूटी है, जो अपनी गहरी जड़ों और कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाती है। अपनी ज्यादा जानी-मानी किस्म, करकुमा लोंगा (पीली हल्दी) के विपरीत, काली हल्दी में अनोखे गुण होते हैं जो इसे पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक स्वास्थ्य तरीकों दोनों के लिए एक मूल्यवान बनाते हैं।

यह लेख काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती के बारे में बताता है, जिसमें इसके लिए आदर्श बढ़ती परिस्थितियाँ, खेती की तकनीकें, कीट प्रबंधन की रणनीतियाँ और किसानों के लिए इसमें मौजूद आर्थिक संभावनाओं के बारे में बताया गया है। जैसे-जैसे प्राकृतिक उपचारों की मांग बढ़ रही है, काली हल्दी की खेती की बारीकियों को समझना इसके फायदों का लाभ उठाने और टिकाऊ कृषि तरीकों को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हो जाता है।

Table of Contents

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  • काली हल्दी के लिए जलवायु और तापमान (Climate and Temperature for Black Turmeric)
  • काली हल्दी के लिए मिट्टी का चयन और तैयारी (Soil Selection and Preparation for Black Turmeric)
  • काली हल्दी के रोपण सामग्री और रोपाई का समय (Planting Time for Black Turmeric)
  • काली हल्दी के पौधों की दूरी और रोपण विधि (Planting Method for Black Turmeric Plants)
  • काली हल्दी के लिए खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizers for Black Turmeric)
  • काली हल्दी में सिंचाई और निराई-गुड़ाई (Irrigation and Weeding in Black Turmeric Crop)
  • काली हल्दी की फसल में रोग और कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control in Black Turmeric)
  • काली हल्दी फसल की अवधि और खुदाई (Black Turmeric Crop Duration and Harvesting)
  • काली हल्दी का उत्पादन और भंडारण (Production and Storage of Black Turmerics)
  • काली हल्दी की खेती पर निष्कर्ष (Conclusion on Black Turmerics Cultivation)
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

काली हल्दी के लिए जलवायु और तापमान (Climate and Temperature for Black Turmeric)

काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह पौधा उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अच्छी तरह विकसित होता है। 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श होता है।

अत्यधिक ठंड या पाले से यह फसल प्रभावित हो सकती है, इसलिए शीत प्रदेशों में इसकी खेती सावधानीपूर्वक करनी चाहिए। मध्यम से अच्छी वर्षा वाले क्षेत्रों में यह फसल बेहतर उत्पादन देती है, हालांकि जलभराव की स्थिति इससे नुकसान पहुँचा सकती है।

काली हल्दी के लिए मिट्टी का चयन और तैयारी (Soil Selection and Preparation for Black Turmeric)

काली हल्दी (Black Turmeric) के लिए हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो। मिट्टी में पर्याप्त जैविक पदार्थ और हल्की अम्लीय से तटस्थ पीएच मात्रा पौधों की वृद्धि के लिए लाभकारी होती है।

खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले गहरी जुताई की जाती है, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद 2-3 बार हल्की जुताई कर खेत को समतल किया जाता है। भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग आवश्यक होता है।

काली हल्दी के रोपण सामग्री और रोपाई का समय (Planting Time for Black Turmeric)

काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती मुख्य रूप से इसके कंदों द्वारा की जाती है। स्वस्थ, रोगमुक्त और अच्छे आकार वाले कंदों का चयन करना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि यही भविष्य की फसल की गुणवत्ता निर्धारित करते हैं। रोपाई के लिए 20 से 30 ग्राम वजन वाले कंद उपयुक्त माने जाते हैं।

भारत में काली हल्दी की रोपाई का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून के बीच होता है, जब मौसम में नमी और गर्मी दोनों पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती हैं। कंदों को लगभग 5–7 सेंटीमीटर गहराई पर लगाया जाता है।

काली हल्दी के पौधों की दूरी और रोपण विधि (Planting Method for Black Turmeric Plants)

उचित दूरी पर रोपण करने से पौधों को पर्याप्त पोषण, हवा और प्रकाश मिलता है। सामान्यतः पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-40 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20-25 सेंटीमीटर रखी जाती है। रोपण के बाद हल्की सिंचाई की जाती है ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।

कई किसान क्यारियों या मेड़ पद्धति से भी काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती करते हैं, जिससे जल निकास बेहतर रहता है और कंद सड़ने की संभावना कम होती है।

काली हल्दी के लिए खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizers for Black Turmeric)

काली हल्दी (Black Turmeric) एक जैविक फसल के रूप में अधिक लाभ देती है, इसलिए इसमें रासायनिक उर्वरकों का सीमित प्रयोग किया जाना चाहिए। खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 8-10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालना लाभकारी होता है। इसके अलावा नीम खली और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग भी किया जा सकता है।

पौधों की बढ़वार के समय आवश्यकता अनुसार जैविक तरल खाद या गोमूत्र आधारित घोल का छिड़काव किया जा सकता है, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन बढ़ता है।

काली हल्दी में सिंचाई और निराई-गुड़ाई (Irrigation and Weeding in Black Turmeric Crop)

काली हल्दी (Black Turmeric) को नियमित लेकिन सीमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। अधिक पानी देने से कंद सड़ सकते हैं, इसलिए जलभराव से बचना चाहिए। गर्मियों में 7-10 दिन के अंतराल पर और वर्षा ऋतु में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करनी चाहिए।

खेत में खरपतवार पौधों के पोषण को प्रभावित करते हैं, इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई आवश्यक होती है। इससे मिट्टी में हवा का संचार भी बेहतर होता है और पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं।

काली हल्दी की फसल में रोग और कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control in Black Turmeric)

काली हल्दी (Black Turmeric) में सामान्यतः रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है, फिर भी कुछ परिस्थितियों में पत्ती धब्बा रोग, कंद सड़न या दीमक जैसी समस्याएँ देखी जा सकती हैं। जैविक खेती में नीम तेल, त्रिकोणीय फेरोमोन ट्रैप और जैविक फफूंदनाशकों का उपयोग करके इन समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से निकाल देना चाहिए ताकि संक्रमण अन्य पौधों तक न फैले।

काली हल्दी फसल की अवधि और खुदाई (Black Turmeric Crop Duration and Harvesting)

काली हल्दी (Black Turmeric) की फसल तैयार होने में लगभग 8 से 9 महीने का समय लगता है। जब पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लगें और सूखने लगें, तब यह संकेत होता है कि कंद खुदाई के लिए तैयार हैं। खुदाई सावधानीपूर्वक करनी चाहिए ताकि कंद को किसी प्रकार की क्षति न पहुँचे। खुदाई के बाद कंदों को साफ पानी से धोकर छाया में सुखाया जाता है।

काली हल्दी का उत्पादन और भंडारण (Production and Storage of Black Turmerics)

उचित देखभाल और सही कृषि तकनीक अपनाने पर एक एकड़ भूमि से 8 से 12 क्विंटल तक काली हल्दी (Black Turmeric) का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। सूखी काली हल्दी का बाजार मूल्य सामान्य हल्दी की तुलना में कई गुना अधिक होता है।

वर्तमान में इसकी कीमत गुणवत्ता और मांग के अनुसार काफी ऊँची रहती है। सूखे कंदों को नमी रहित और हवादार स्थान पर संग्रहित किया जाना चाहिए, जिससे उनकी औषधीय गुणवत्ता बनी रहे।

काली हल्दी की खेती पर निष्कर्ष (Conclusion on Black Turmerics Cultivation)

काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती किसानों के लिए एक उभरता हुआ और अत्यंत लाभकारी विकल्प है। इसकी औषधीय मांग, सीमित उत्पादन और ऊँचे बाजार मूल्य के कारण यह फसल भविष्य में और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से, जैविक पद्धति अपनाकर और उचित बाजार व्यवस्था के साथ इसकी खेती करें, तो कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। काली हल्दी न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि स्वास्थ्य और औषधीय क्षेत्र में भी एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)

काली हल्दी की खेती कैसे करें?

काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती के लिए भुरभुरी दोमट मिट्टी और अच्छे जल निकासी वाली जगह चुनें, जून-जुलाई में बुवाई करें। कंदों को जैविक खाद (गोबर की खाद) के साथ 8-9 इंच की दूरी पर 2-3 इंच गहरा बोएं, और शुरुआत में हल्की सिंचाई करें। अधिक पानी से बचें क्योंकि यह सड़ सकती है। 8-9 महीने बाद फसल तैयार हो जाती है। अच्छी उपज के लिए मिट्टी की नमी और हवादार वातावरण का ध्यान रखें।

काली हल्दी के लिए कैसी जलवायु अच्छी रहती है?

काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती के लिए गर्म और नमी वाली जलवायु सर्वोत्तम होती है। 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान और मध्यम वर्षा वाले क्षेत्र इसके लिए उपयुक्त माने जाते हैं। अत्यधिक ठंड और पाले से फसल को नुकसान हो सकता है।

काली हल्दी के लिए कैसी मिट्टी उपयुक्त होती है?

अच्छे जल निकास वाली हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी काली हल्दी (Black Turmeric) के लिए सबसे अच्छी होती है। मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा अधिक होनी चाहिए और पीएच मान हल्का अम्लीय से तटस्थ होना चाहिए।

काली हल्दी की सबसे अच्छी किस्में कौन सी है?

काली हल्दी (Black Turmeric) की कोई विशेष किस्में नहीं होती, बल्कि यह स्वयं एक दुर्लभ और औषधीय प्रजाति है, जो गहरे नीले-काले रंग की होती है, और इसे इसकी तीव्र सुगंध व औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। जिसमें जंगली काली हल्दी और असम काली हल्दी जैसी किस्में अपनी शुद्धता और शक्ति के लिए सबसे अच्छी मानी जाती हैं, जिनका उपयोग आयुर्वेदिक और कॉस्मेटिक उत्पादों में होता है।

काली हल्दी की रोपाई का सही समय क्या है?

काली हल्दी (Black Turmeric) की रोपाई अप्रैल से जून के बीच की जाती है। इस समय मौसम में पर्याप्त गर्मी और नमी होती है, जिससे कंदों का अंकुरण अच्छा होता है।

काली हल्दी की खेती बीज से होती है या कंद से?

काली हल्दी (Black Turmeric) की खेती बीज से नहीं, बल्कि इसके कंदों द्वारा की जाती है। स्वस्थ, रोगमुक्त और मध्यम आकार के कंद रोपाई के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।

काली हल्दी के कितने कंदों की जरूरत होती है?

एक एकड़ भूमि में लगभग 800 से 1000 किलोग्राम काली हल्दी (Black Turmeric) के कंदों की आवश्यकता होती है, जो रोपाई दूरी और खेत की तैयारी पर निर्भर करता है।

काली हल्दी कितने समय में तैयार हो जाती है?

काली हल्दी (Black Turmeric) की फसल लगभग 8 से 9 महीने में तैयार हो जाती है। जब पौधों की पत्तियाँ पीली होकर सूखने लगें, तब कंद खुदाई के लिए तैयार माने जाते हैं।

काली हल्दी में कितनी सिंचाई की जरूरत होती है?

काली हल्दी (Black Turmeric) की फसल को मध्यम सिंचाई की आवश्यकता होती है। अधिक पानी देने से कंद सड़ सकते हैं, इसलिए जलभराव से बचना जरूरी होता है। गर्मियों में 7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई पर्याप्त होती है।

काली हल्दी में कौन-कौन से रोग और कीट लगते हैं?

सामान्यत: काली हल्दी (Black Turmeric) में रोग कम लगते हैं, लेकिन कभी-कभी कंद सड़न, पत्ती धब्बा रोग और दीमक की समस्या हो सकती है। जैविक फफूंदनाशक और नीम आधारित उत्पादों से इनका नियंत्रण किया जा सकता है।

काली हल्दी का औसत उत्पादन कितना होता है?

उचित देखभाल करने पर एक एकड़ भूमि से लगभग 8 से 12 क्विंटल काली हल्दी (Black Turmeric) का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

काली हल्दी की बिक्री कहाँ की जा सकती है?

काली हल्दी (Black Turmeric) की बिक्री आयुर्वेदिक दवा कंपनियों, हर्बल उत्पाद निर्माताओं, औषधीय मंडियों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सीधे व्यापारियों को की जा सकती है।

क्या काली हल्दी को बगीचे में उगाया जा सकता है?

हाँ, काली हल्दी (Black Turmeric) को बगीचे या गमलों में आसानी से उगाया जा सकता है, क्योंकि यह उष्णकटिबंधीय पौधा है और अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई मिट्टी पसंद करता है, जिसमें भरपूर जैविक पदार्थ हों और तापमान 15-40 डिग्री सेल्सियस के बीच हो; बस ध्यान रखें कि जलभराव न हो और सीधी तेज धूप से बचाएं।

काली हल्दी के प्रमुख उपयोग क्या है?

काली हल्दी (Black Turmeric) का उपयोग मुख्य रूप से औषधीय गुणों के लिए किया जाता है, जैसे दर्द, सूजन, सर्दी-खांसी, पाचन समस्याओं, त्वचा रोगों और मधुमेह में राहत देना, इसके साथ ही यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है और कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक है।

काली हल्दी के औषधीय लाभ क्या है?

काली हल्दी (Black Turmeric) दर्द, सूजन, खांसी-जुकाम, पेट की समस्याओं, त्वचा रोगों और कमजोर इम्यूनिटी में फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो कैंसर और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

काली हल्दी सामान्य हल्दी से कैसे अलग है?

काली हल्दी (Black Turmeric) एक दुर्लभ औषधीय पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Curcuma caesia है। सामान्य हल्दी के कंद पीले रंग के होते हैं, जबकि काली हल्दी के कंद अंदर से गहरे नीले या काले रंग के होते हैं। इसके औषधीय गुण सामान्य हल्दी से अधिक शक्तिशाली माने जाते हैं।

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